कहीं आप की फैक्ट्री में भूत प्रेत का वास तो नहीं

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Thursday, November 28, 2013-8:05 AM

 

वास्तुशास्त्र एक विज्ञान है। किसी भी फैक्ट्री में वास्तु दोष होने पर उनका निराकरण केवल वैज्ञानिक तरीके से ही करना चाहिए और उसका एकमात्र तरीका फैक्ट्री परिसर व उसके भवन की बनावट में वास्तुनुकुल परिर्वतन कर वास्तु दोषों को दूर किया जा सकता है। वास्तु दोष के कारण फैक्ट्रियां भूतहा महल बन जाती हैं क्योंकि वास्तुदोषों के कारण ही फैक्टरीयां घाटे में चल रही होती है और वहां उत्पन्न होने वाली नकारात्मक ऊर्जा के कारण कर्मचारियों व मालिक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती है। इस कारण वह परेशान एवं भयभीत रहते हैं।

इस प्रकार के भय का वातावरण फैक्ट्री के नैऋत्य कोण के दोषपूर्ण होने के कारण होता है। ऐसी फैक्ट्री जिनके नैऋत्य कोण का फर्श फैक्ट्री के बाकी भाग के फर्श से नीचा हो, वहां नमी रहती हो व पानी भी जमा रहता हो, काई जमी हो दिवारों पर सीलन रहती हो, दिवारों पर से रंग की पपड़ियां उतरी हुई हो। नैऋत्य कोण के दक्षिण या पश्चिम भाग में बढ़ाव हो।

फैक्ट्री के इस भाग में हवा का प्रवाह निर्बाध्य रूप से न हो पाता हो। इस प्रकार के दोषों के कारण फैक्ट्री के नैऋत्य कोण में बहुत ज्यादा मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है। फैक्ट्री के नैऋत्य कोण के साथ यदि ईशान कोण में भी थोड़ी ऊंचाई पर टायलट बना हो या भारी मशीन लगी हो, दबा कटा या घटा हो या जरूरत से ज्यादा पूर्व ईशान या उत्तर ईशान की ओर बढ़ जाए तो वहां रहने वालों को यह भ्रम होता है कि उनकी फैक्ट्री में भूत प्रेत का वास है।

फैक्ट्री के मध्य भाग जिसे वास्तु में बह्मा स्थल कहते हैं। यहां किसी भी प्रकार का भारी र्निमाण कार्य या मशीनरी का होना भी श्रमिकों और मालिक की मानसिक स्थिति बिगाड़ता है और फैक्ट्री घाटे में चलती है। जिस फैक्ट्री के श्रमिकों और मालिक में इस प्रकार के भ्रम और भय से पिड़ित है, उन्हें चाहिए कि वह झाड़ - फूंक, टोने - टोटके और तंत्र - मंत्र आदि के चक्कर में न पड़कर अपनी फैक्ट्री के नैऋत्य कोण एवं ईशान कोण के दोणों को दूर करें।


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