आत्मा का अस्तित्व क्या है

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Thursday, November 28, 2013-8:06 AM
 

 

पिता बच्चे के लिए खिलौने लेकर आते हैं और बच्चा उन खिलौनों से खेलने में मग्न हो जाता है और पिता उसे बार बार आवाज देते हैं मगर वो खिलौने के साथ इतना मग्न हो जाता है कि पिता की आवाज सुन कर भी उस आवाज को अनसुना कर देता है। वो यह भी भूल जाता है कि वो जिस खिलौने के साथ खेल रहा है वो पिता ने ही उसे लाकर दिया है।

इसी प्रकार इस संसार की प्राप्तियां जिसकी बदौलत हैं इन्सान उसी तरफ अपने कदम नहीं बढ़ाता। यह जो मानव जीवन मिला है इसे संसार तक सिमित रहकर ही नहीं बिता देना है। इस सत्य की जानकारी करके इस जीवन की यात्रा को तय करना है। इस मूल तत्व का बोध हो जाने के कारण ये पहचान हो गई कि मेरा अस्तित्व क्या है

मैं केवल शरीर नहीं हूं, मैं तो आत्मा हूं जो एक परमात्मा की अंश है। परमात्मा न हिंदू है, न मुस्लिम है, न सिख, न ईसाई है न ही यहुदी है। परमात्मा से सारा संसार उपजा है जड़ चेतन, दृश्य अदृश्य जिसकी बदौलत हैं इसी की मैं अंश हूं। जिस प्रकार बादलों के छा जानें से पर्वतों की खूबसूरती नजर नहीं आती इसी प्रकार यह अज्ञानता के गुब्बारे के परे हमें हकीकत और सच्चाई दिखाई नहीं देती।

आत्मा एक ऐसी जीवन-शक्‍ति है जिसके बल पर हमारा शरीर ज़िंदा रहता है। यह एक शक्ति है, कोई व्यक्ति नहीं। इस जीवन-शक्ति के बिना हमारे प्राण छूट जाते हैं और हम मिट्टी में फिर मिल जाते हैं। जब शरीर से आत्मा या जीवन-शक्ति निकलती है, तो शरीर मर जाता है और वहीं लौट जाता है जहां से वह निकला था यानी मिट्टी में। उसी तरह जीवन-शक्ति भी वहीं लौट जाती है जहां से वह आयी थी परमात्मा के पास।


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