जिस भगवान को हमने देखा नहीं उसकी भक्ति कैसे करें

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Friday, November 29, 2013-9:19 AM
 
 

जब भी भगवान या अपने इष्ट का ध्यान करें या मंत्र जप करें, वह नाम और जप उजागर न करें क्योंकि धार्मिक महत्व की दृष्टि से भगवान के नाम का ध्यान जितना गुप्त रखा जाता है, वह उतना ही असरदार और फलदायी होता है। आप जिस भी देवता या इष्ट का नाम लें, उस नाम का मतलब और देव स्वरूप का ध्यान कर जप करें।

इससे मन शांत और एकाग्र रहता है। भगवान की पूजा, ध्यान या उनका नाम जप किसी इच्छा, कामना के मकसद से न करें, बिना स्वार्थ या हितपूर्ति की कामना से श्रद्धा और विश्वास के साथ करें। धार्मिक दृष्टि से ऐसी निस्वार्थ भक्ति से भक्त को भगवान की प्रसन्नता और अदृश्य कृपा मिलती है। साथ ही वह शांत और सहज हो जाता है।

जिस भगवान की हम भक्ति करते हैं उसे आज तक हमने देखा नहीं और जिसे आज तक हमने देखा नहीं उसकी भक्ति कैसे कर सकते हैं, उसे प्यार कैसे कर सकते हैं केवल पूजा, ध्यान या नाम जप के जरिए ही हम उस भगवान की भक्ति कर सकते हैं। नाम की कमाई करके इस रचना में से हमारा मोह और प्यार निकल जाता है, उस भगवान से हमारा मोह और प्यार पैदा हो जाता है।


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