संतोषी माता का लो नाम जिससे बन जाए सब काम

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Friday, December 06, 2013-7:47 AM

शुक्रवार के दिन भगवान शुक्र संतोषी माता तथा वैभव लक्ष्मी देवी का पूजन व व्रत किया जाता है। तीनों व्रतों को करने की विधि अलग- अलग है। शुक्रवार का व्रत धन, विवाह, संतान, भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस व्रत को किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार के दिन किया जाता है।

संतोषी माता का व्रत मां को अपनी भक्ति और निष्ठा से खुश करने के लिए सर्वोत्तम व्रत है। संतोषी माता को हिंदू धर्म में संतोष, सुख, शांति और वैभव की माता के रुप में पूजा जाता है।शुक्रवार व्रत विधि (संतोषी माता) इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठें, और घर कि सफाई करने के बाद पूरे घर में गंगा जल छिडक कर शुद्ध कर लें। इसके पश्चात स्नान आदि से निवृ्त होकर, घर के ईशान कोण दिशा में एक एकान्त स्थान पर संतोषी माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

पूर्ण पूजन सामग्री तथा किसी बड़े पात्र में शुद्ध जल भरकर रखें। जल भरे पात्र पर गुड़ और चने से भरकर दूसरा पात्र रखें। संतोषी माता की विधि-विधान से पूजा करें। इसके पश्चात संतोषी माता की कथा सुनें। तत्पश्चात आरती कर सभी को गुड़-चने का प्रसाद बांटें।

अंत में बड़े पात्र में भरे जल को घर में जगह-जगह छिड़क दें तथा शेष जल को तुलसी के पौधे में डाल दें. इसी प्रकार 16 शुक्रवार का नियमित उपवास रखें। अंतिम शुक्रवार को व्रत का विसर्जन करें। विसर्जन के दिन उपरोक्त विधि से संतोषी माता की पूजा कर 8 बालकों को खीर-पुरी का भोजन कराएं तथा दक्षिणा व केले का प्रसाद देकर उन्हें विदा करें। अंत में स्वयं भोजन ग्रहण करें।

संतोषी माता के व्रत के दिन क्या न करें ?

इस दिन व्रत करने वाले स्त्री-पुरुष खट्टी चीज का न ही स्पर्श करें और न ही खाएं।. गुड़ और चने का प्रसाद स्वयं भी अवश्य खाना चाहिए। भोजन में कोई खट्टी चीज, अचार और खट्टा फल नहीं खाना चाहिए। व्रत करने वाले के परिवार के लोग भी उस दिन कोई खट्टी चीज नहीं खाए।

 


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