शनि देव किस से होते हैं भयभीत और क्यों ?

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Saturday, December 07, 2013-9:53 AM

शनि देव की कृपा प्राप्ति के लिए लोग शनिवार को विभिन्न उपाय एवं टोटके करते हैं जिससे शनि देव खुश होकर उन पर अपनी अनुकम्पा बनाएं रखें। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जिन से लोग भयभीत होते हैं वह भी किसी से भयभीत होते हैं। ऋषि पिप्लाद भगवान शिव का अवतार माने जाते हैं। इनके भक्तों से शनि देव दूरी बनाएं रखते हैं क्योंकि

पिप्लाद ऋषि को जब ज्ञात हुआ कि शनि देव के कारण उन्हें बचपन में ही अपने माता-पिता को खोना पड़ा था तो उन्हें बहुत क्रोध आया और वह तपस्या करने बैठ गए। अपने तप के बल पर ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर उनसे ब्रह्मदंड वर के रूप में प्राप्त किया तत्पश्चात शनि देव की खोज में निकल पड़े। जब शनि देव मिले तो वह पीपल वृक्ष के नीचे बैठ कर विश्राम कर रहे थे। शनि देव को देखते ही पिप्लाद ऋषि ने उनके ऊपर ब्रह्मदंड से प्रहार किया।

जिससे शनि देव के दोनों पैर टूट गए। शनि देव दर्द से करहाने लगे और भगवान शिव को पुकारने लगे। भगवान शिव ने साक्षात प्रगट होकर पिप्पलाद जी का क्रोध शांत किया और शनि देव की रक्षा की। उसी दिन से ही शनि पिप्पलाद जी से भय खाने लगे। यह वही ऋषि हैं जिन्होंने शनि देव की चाल को मंद कर दिया था। पिप्लाद जी का जन्म पीपल के वृक्ष के नीचे हुआ था और पीपल के पत्तों को खाकर ही इन्होंने तप किया था। शनि का अशुभ प्रभाव दूर करने के लिए ही पीपल की पूजा करने का विधान है।

 

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