मिठास में बदलें दाम्पत्य जीवन की कड़वाहट

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Monday, December 09, 2013-7:49 AM

हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है विवाह। विवाह का वास्तविक अर्थ है- दो आत्माओं का आत्मिक मिलन। गृहस्थ जीवन का सुख संसार का सबसे बड़ा सुख है परंतु परिवार में कलह व्यक्ति के जीवन में परेशानियां पैदा करती है। ससुराल में जीवन को सुखमय एवं खुशहाल बनाने के लिए ज्योतिष में कुछ उपाए बताए गए हैं।

1 पति-पत्नी के आपसी मतभेदों को दूर करने के लिए दोमुखी तथा गौरीशंकर रूद्राक्ष को धारण करें।

2 सुखी वैवाहिक जीवन के लिए घर के देवालय में प्रतिदिन प्रात: पूजा करते समय शंखनाद करें।

3 पति-पत्नी के आपसी मत भेद मिटाने के लिए 11 गोमती चक्रों को लाल सिंदूर की डिब्बी में भरकर घर में किसी सुरक्षित स्थान पर रखें।

4 घर में सुख-शांति स्थापित करने के लिए पति-पत्नी दोनों मिलकर लाल वस्त्र में मसूर की दाल, रक्त चंदन एवं पांच लघु नारियल बांध लें। फिर हाथ जोडकर पारिवारिक क्लेश की मुक्ति की प्रार्थना करें तथा धूपादि देकर उस पोटली को गंगा में प्रवाहित कर दें।

5 दाम्पत्य जीवन में उत्पन्न हुई समस्याओं का निदान करना चाहते हैं तो नियमित रूप से केले के वृक्ष की सेवा करें।

6 दाम्पत्य जीवन में खुशहाली लाने के लिए शनिवार को पीपल के पेड़ पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

7 पति पत्नी को समय न दे पा रहा हो अथवा दोनों के में प्रेम में कमी आ रही हो तो पत्नी को चाहिए कि वह देवताओं के गुरू बृहस्पति की सेवा एवं पूजा करें।

8 पति और पत्नी दोनों ही एक-दूसरे की न सुनते हों, जिसके परिणामस्वरूप उनके दाम्पत्य जीवन में अशांति व्याप्त हो रही हो तो सुबह किसी देवालय में जाकर शिवलिंग की पूजा करके निम्न मंत्र का पांच माला जप करें-

ओम् नम: संभवाय च मयो भवाय च नम: शंकराय च मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च।।

9 दाम्पत्य में अशांति के निवारण के लिए प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर भगवती दुर्गा के चित्र के सम्मुख दीपक और अगरबत्ती जलाकर पुष्प अर्पित करें।

10 यदि किसी कारण वश पति-पत्नी में अनबन हो जाने के कारण दाम्पत्य जीवन में अशांति व्याप्त हो गई हो तो निम्नलिखित मंत्रों का 21 बार नित्य पाठ करने से उनमें पहले जैसा प्रेम उत्पन्न हो जाता है-

ओम यथा नकुलो विच्छिद्य सन्दधात्यहि पुन:।
एवा कामस्य विच्छिनं सन्धेहि वीर्यावति:।।
अक्ष्यौ नौ मधुसंकाशे अनीके नौ समंजनम।
अन्त: कृशुष्व मां ह्रदि मन इन्नौ सहासति।।


 


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