वास्तु शास्त्र : मनोकामना पूर्ति का एक सरल प्रयोग

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Wednesday, December 25, 2013-9:59 AM
वास्तु की स्थापना गणेश जी की पूजा के अभाव में अकल्पनीय है अन्यथा उपयोगकर्ता की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक हानि होती है। गणपति जी की अराधना से तमाम वास्तु दोषों को समाप्त किया जा सकता है। प्रतिदिन गणेश जी का ध्यान करने से वास्तु दोष उत्पन्न होने की संभावना बहुत कम होती है।

1 समस्त कामनाओं की सिद्धि के लिए सिन्दूरी रंग के गणपति घर में स्थापित करने चाहिए। उनकी सूंड बाएं ओर घुमी हुई होनी चाहिए।

2 दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेश जी जिद्दी होते हैं तथा वे देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं।

3 गणेश जी का चित्र अथवा मूर्ति स्थापित करते समय ध्यान रखें कि चित्र अथवा मूर्ति में मोदक और चूहा अवश्य होने चाहिए।

4 घर में बैठे हुए गणेश जी तथा कार्यस्थल पर खड़े हुए गणपति जी को स्थापित करें गणेश जी के दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए होने चाहिए। इससे कार्य में स्थिरता का समावेश होता है।

5 भवन के ब्रह्म स्थान अर्थात केंद्र में, ईशान कोण एवं पूर्व दिशा में गणेश जी का स्वरूप स्थापित करना शुभ होता है।

6 टॉयलेट अथवा ऐसे स्थान पर गणेश जी का स्वरूप नहीं लगाना चाहिए जहां लोगों को थूकने आदि से रोकना हो। ऐसा करने से गणेश जी का अपमान होता है और आप पापों के भागी बनते हैं।

7 स्वेत आर्क का वास्तु गणेश सभी प्रकार के दोषों को मुक्ति हेतु सबसे सरल साधन तथा मनोकामना सिद्ध करनेवाला कहा जाता है।

8 स्वेत आर्क एक ऐसा पौधा होता है जिसको हिंदू दर्शन के अनुसार साक्षात् ही गणेश का रूप कहा जाता है। प्रतिमा के आभाव में इसकी लकड़ी एवं पुष्प पत्ते सभी भवन को वास्तु दोषों से मुक्त बनते हैं ।

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