शनिदेव के कोप से राहत पाते हैं यहां आने वाले श्रद्धालु

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Saturday, December 28, 2013-9:13 AM
कोकिलावन शनि सिद्धपीठ पर्यटकों की आस्था का केंद्र है। कोकिलावन शनि सिद्धपीठ भारत में उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में स्थित है। कोसी से लगभग छ: किलोमीटर दूर पश्चिम में बरसाना के पास और नन्द गांव से सटा हुआ यह पवित्र स्थान भगवान शनि देव को समर्पित है। कोकिलावन धाम का यह सुन्दर परिसर लगभग 20 एकड में फैला है। इसमें श्री शनि देव मंदिर, श्री देव बिहारी मंदिर, श्री गोकुलेश्वर महादेव मंदिर , श्री गिरिराज मंदिर, श्री बाबा बनखंडी मंदिर प्रमुख हैं। यहां दो प्राचीन सरोवर और गोऊ शाला भी हैं।

हर शनिवार लाखों श्रद्धालु कोकिलावन धाम की "ॐ शं शनिश्चराय नम:" और जय शनि देव का उच्चारण करते हुए परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा मार्ग लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लम्बा है जिसे साधारण गति से लगभग चालीस मिनट में पूरा किया जा सकता है। मान्यता है कि शनिधाम कोकिला वन में बने सूर्य कुंड में स्नान के बाद शनिदेव के दर्शन करने वाले को शनिदेव की काली छाया नहीं सताती।

जीवन में किसी भी तरह की कठिनाई हो या शनि ग्रह का प्रकोप है, लेकिन यहां जाकर लोग भय‍मुक्त हो जाते हैं। मान्यता अनुसार भक्त को तत्काल लाभ मिलता है। जनश्रुति है कि उक्त स्थान पर जाकर ही लोग शनि के दंड से बच सकते हैं, किसी अन्य स्थान पर नहीं। इसके बारे में पौराणिक मान्यता है कि यहां शनिदेव के रूप में भगवान कृष्ण विद्यमान रहते हैं।

कोकिला वन का पौराणिक महत्व है। कोकिला वन शनिदेव मंदिर के महंत बताते हैं कि द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन की इच्छा शनिदेव के मन में हुई। उन्होंने भगवान से नंदगांव में दर्शन पाने के लिए इजाजत मांगी। शनिदेव का भयंकर रूप देखकर नंदगांववासियों में भय की आशंका के चलते भगवान ने उन्हें नंदगांव आने की इजाजत नहीं दी। श्रीकृष्ण की आज्ञा से शनिदेव ने इस स्थान पर उनके दर्शन कोयल का रूप लेकर किए थे। इसी कारण यह स्थान कोकिला वन कहलाया।

मान्यता है कि जो इस वन की परिक्रमा करके शनिदेव की पूजा करेगा वही कृष्ण की कृपा पाएगा और उस पर से शनिदेव का प्रकोप भी हट जाएगा। इसके बारे में पौराणिक मान्यता है कि यहां शनिदेव के रूप में भगवान कृष्ण विद्यमान रहते हैं। बृज प्रदेश के निवासियों के अनुसार श्री कृष्ण ने जब शनि देव को दर्शन दिया था तब आशीर्वाद भी दिया था कि यह कोकिलावन उनका है,और जो कोकिलावन की परिक्रमा करेगा, शनिदेव की पूजा अर्चना करेगा, वह मेरे साथ ही शनिदेव की कृपा भी प्राप्त कर सकेगा। जो भी भक्त इस शनि सिद्ध पीठ के दर्शन, पूजा पाठ का अन्तर्मुखी होकर सद्भावना से विश्वास करेगा, वह भी शनि की अमोघ कृपा प्राप्त करेगा, किसी भी उपद्रव से ग्रस्त नही होगा I


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