समृद्धि और सौभाग्य के लिए गुरुवार को इस मंत्र से करें गुरु पूजा

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Thursday, January 02, 2014-4:20 AM

देवगुरु बृहस्पति की उपासना ज्ञान, बुद्धि, सौभाग्य, दाम्पत्य सुख देने वाली ही मानी गई है। गुरु बृहस्पति की उपासना के लिए गुरुवार का दिन बहुत ही शुभ होता है। ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक भी गुरु ग्रह शुभ ग्रह होता है। इसके अच्छे प्रभाव से व्यक्ति वैवाहिक सुख, धनलाभ और संतान सुख पाता है। देवगुरु बृहस्पति के ‍तंत्रोक्त मंत्र ना सिर्फ धन और वैभव की दृष्टि से चमत्कारी है बल्कि तुरंत असर करने वाले हैं। आप किसी भी एक गुरु मंत्र का गुरुवार के दिन जप कर सकते हैं। इन चमत्कारी पांचों मंत्रों की जप संख्या 19 हजार है।

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:।
 
ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:।

ॐ गुं गुरवे नम:।

ॐ बृं बृहस्पतये नम:।

ॐ क्लीं बृहस्पतये नम:।


गुरु मंत्र का यथाशक्ति स्मरण करें -

पीताम्बर: पीतवपु: किरीटी चतुर्भुजो देवगुरु प्रशान्त:।
यथाक्षसूत्रं च कमण्डलुञ्च दण्ड च विभ्रद्वरदोस्तु।।


गुरू, पुरोहित और शिक्षक में बृहस्पति जी का प्रतिरूप होता है। सच्चे मन से इनकी  सेवा करने से बृहस्पति के अशुभ प्रभावों में कमी आती है। पिता, दादा और गुरु का आदर करने से गुरु अपना शुभ प्रभाव स्वयं ही देने लगते हैं। जिन व्यक्तियों पर बृहस्पतिदेव की कृपा एवं प्रभाव होता है, वे  धार्मिक, आस्थावान, दर्शनिक, विज्ञान में रूचि रखने वाले, सत्यनिष्ठ, परोपकारी, कर्तव्यपरायण, संतुष्ट एवं कानून का पालन करने वाले होते हैं। अगर आप भी समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हैं तो इस प्रकार गुरु उपासना करें -

    * सुबह नहाकर नवग्रह मंदिर में गुरु बृहस्पति की प्रतिमा को यथासंभव केसर के दूध या गंगाजल से स्नान कराएं।

    * देवगुरु की केसरिया गंध, अक्षत, पीली पूजा सामग्री, जिनमें पीले फूल, पीला वस्त्र, नैवेद्य में पीले पकवान शामिल हों, अर्पित करें।

    * पूजा व मंत्र जप के बाद पीली वस्तुओं जैसे चने की दाल का दान करें। सक्षम होने पर सोने की वस्तु का भी दान कर सकते हैं।

    * केला और पीले रंग की मिठाईयां गरीबों, पक्षियों विशेषकर कौओं को खिलाएं।

    * केले के पौधे पर गौघृत का दीपक जलाएं।

    * धूप व घी के दीप से गुरु बृहस्पति की आरती कर मनोवांछित इच्छाओं को पूरा करने की कामना करें।

    * सफेद चन्दन और केसर मिलाकर मस्तक पर टीका लगाएं।

     * बृहस्पतिवार को व्रत रखने से बृहस्पति देव की अनुकम्पा बनी रहती है।


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