रविवार व्रत: सूर्य देव को कैसे करें प्रसन्न

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Sunday, January 05, 2014-5:06 AM

रविवार व्रत कथा कहने पढऩे व सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत करने व कथा सुनने से बांझ स्त्रियों को पुत्र की प्राप्ति होती है। प्राचीन काल में एक बुढिय़ां थी। वह नियमित रूप से रविवार का व्रत करती थी।

रविवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर बुढिय़ां स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती तदउपरांत सूर्य भगवान की पूजा करती तथा कथा सुनकर सूर्य भगवान को भोग लगाकर दिन में एक समय भोजन करती। इसी तरह रविवार का व्रत करती। सूर्य भगवान की कृपा से बुढिय़ां को किसी प्रकार की कोई चिन्ता व कष्ट नहीं था। उसका घर धन-धान्य से भरा हुआ था। उस बुढिय़ां को सुखी देख उसकी पड़ोसन उससे बहुत जलती। बुढिय़ां रोजाना पड़ोसन के आंगन में बंधी गाय का गोबर लाती और अपना घर लीपती।

शनिवार के दिन रात को पड़ोसन ने अपनी गाय को घर के भीतर बांध दिया ताकि बुढिय़ा अपना घर न लीप सके। रविवार को गोबर न मिलने से बुढिय़ा अपना आंगन नहीं लीप सकी। आंगन न लीप पाने के कारण उस बुढिय़ा ने सूर्य भगवान को भोग नहीं लगाया और उस दिन स्वयं भी भोजन नहीं किया। सूर्यास्त होने पर बुढिय़ा भूखी-प्यासी सो गई। रात्रि में सूर्य भगवान ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और व्रत न करने तथा उन्हें भोग न लगाने का कारण पूछा। बुढिय़ा ने बहुत ही करुण स्वर में पड़ोसन के द्वारा घर के अन्दर गाय बांधने और गोबर न मिल पाने की बात बोली।

सूर्य भगवान ने अपनी अनन्य भक्त बुढिय़ा की परेशानी का कारण जानकर उसके सब दु:ख दूर करते हुए कहा, हे माता, तुम प्रत्येक रविवार को मेरी पूजा और व्रत करती हो। मैं तुमसे अति प्रसन्न हूं और तुम्हें ऐसी गाय प्रदान करता हूं जो तुम्हारे घर-आंगन को धन-धान्य से भर देगी। तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूरी होगी। स्वप्न में उस बुढिय़ां को ऐसा वरदान देकर सूर्य भगवान अन्तर्धान हो गए। प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व उस बुढिय़ां की आंख खुली तो वह अपने घर के आंगन में सुन्दर गाय और बछड़े को देखकर हैरान हो गई।

गाय को आंगन में बांधकर उसने जल्दी से उसे चारा लाकर खिलाया। पड़ोसन ने उस बुढिय़ा के आंगन में बंधी सुन्दर गाय और बछड़े को देखा तो वह उससे और अधिक जलने लगी। तभी गाय ने सोने का गोबर किया। गोबर को देखते ही पड़ोसन की आंखें फट गईं। पड़ोसन ने उस बुढिय़ा को आसपास न पाकर तुरन्त उस गोबर को उठाया और अपने घर ले गई तथा अपनी गाय का गोबर वहां रख आई। सोने के गोबर से पड़ोसन कुछ ही दिनों में धनवान हो गई। गाय प्रति दिन सूर्योदय से पूर्व सोने का गोबर करती और बुढिय़ां के उठने के पहले ही पड़ोसन उस गोबर को उठाकर ले जाती। बहुत दिनों तक बुढिय़ां को सोने के गोबर के बारे में कुछ पता ही नहीं चला।

जब सूर्य भगवान को पड़ोसन की चालाकी का पता चला तो उन्होंने तेज आंधी चलाई। आंधी का प्रकोप देखकर बुढिय़ा ने गाय को घर के भीतर बांध दिया। सुबह उठकर बुढिय़ा ने सोने का गोबर देखा उसे बहुत आश्चर्य हुआ। उस दिन के बाद बुढिय़ां गाय को घर के भीतर बांधने लगी। सोने के गोबर से बुढिय़ां कुछ ही दिनों में बहुत धनी हो गई। उस बुढिय़ा के धनी होने से पड़ोसन बुरी तरह जल-भुनकर राख हो गई और उसने अपने पति को समझा-बुझाकर उस नगर के राजा के पास भेज दिया। राजा को जब बुढिय़ा के पास सोने के गोबर देने वाली गाय के बारे में पता चला तो उसने अपने सैनिक भेजकर बुढिय़ा की गाय लाने का आदेश दिया। सैनिक उस बुढिय़ां के घर पहुंचे।

उस समय बुढिय़ा सूर्य भगवान को भोग लगाकर स्वयं भोजन ग्रहण करने वाली थी। राजा के सैनिकों ने गाय और बछड़े को खोला और अपने साथ महल की ओर लेकर चल पड़े। बुढिय़ां ने सैनिकों से गाय और उसके बछड़े को न ले जाने की प्रार्थना की, बहुत रोई-चिल्लाई, लेकिन राजा के सैनिक नहीं माने। गाय व बछड़े के चले जाने से बुढिय़ा को बहुत दु:ख हुआ। उस दिन उसने कुछ नहीं खाया और सारी रात सूर्य भगवान से गाय व बछड़े को लौटाने के लिए प्रार्थना करती रही। सुन्दर गाय को देखकर राजा बहुत खुश हुआ। सुबह जब राजा ने सोने का गोबर देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा।

उधर सूर्य भगवान को भूखी-प्यासी बुढिय़ा को इस तरह प्रार्थना करते देख उस पर बहुत करुणा आई। अगली रात सूर्य भगवान ने राजा को स्वप्न में कहा," राजन! बुढिय़ा की गाय व बछड़ा तुरन्त लौटा दो, नहीं तो तुम पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ेगा। तुम्हारा महल नष्ट हो जाएगा।" सूर्य भगवान के स्वप्न से बुरी तरह भयभीत राजा ने प्रात: उठते ही गाय और बछड़ा बुढिय़ा को लौटा दिया। राजा ने बहुत-सा धन देकर बुढिय़ां से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। राजा ने पड़ोसन और उसके पति को उनकी इस दुष्टता के लिए दण्ड दिया।

फिर राजा ने पूरे राज्य में घोषणा कराई कि सभी स्त्री-पुरुष रविवार का व्रत किया करें। रविवार का व्रत करने से सभी लोगों के घर धन-धान्य से भर गए। चारों ओर खुशहाली छा गई। सभी लोगों के शारीरिक कष्ट दूर हो गए। राज्य में सभी स्त्री-पुरुष सुखी जीवन-यापन करने लगे। सूर्य देव को प्रसन्न रखने के लिए यह व्रत किया जाता है । यह व्रत शुक्ल पक्ष से आरम्भ करना चाहिए, व्रत के दिन स्नानादि से निवृत होकर भगवन सूर्य नारायण को गंधाक्षत, पुष्प, दुर्वायुक्त, अघ्र्य प्रदान करें।

यह व्रत आरोग्यता प्रदान करने वाला तथा तेजवर्धक है। रविवार के कम से कम तीस या बारह व्रत रखने चाहिए, व्रत के दिन नमक नहीं खाएं उस दिन केवल गेहूं की रोटी घी और शक्कर के साथ या गेहूं तथा गुड से बना हलवा इलाइची डालकर सूर्यास्त से पहले भोजन करें यथा शक्ति ॐ ह्रां ह्रींह्रौं स:सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।


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