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इन उपायों से गणेश जी दूर कर देते हैं सब विघ्न और बाधाएं

  • इन उपायों से गणेश जी दूर कर देते हैं सब विघ्न और बाधाएं
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Wednesday, January 08, 2014-9:56 AM
गणेश जी का रूप निराला है

चेहरा भी कितना भोला-भाला है

जिस पर भी आती है कोई मुसीबत

उसे गणपति ने संभाला है

गणेश जी सभी जीव जातियों के ईश-स्वामी हैं। भगवान श्री गणेश के ‘सौम्य रूप’ मूर्ति पूजन करने से समस्त प्रकार के रोग और शोक दूर हो जाते हैं। गणेश जी के अनेक रूप प्रसिद्ध हैं जैसे हरिद्रा गणेश, दूर्वा गणेश, शमी गणेश, गोमेद गणेश आदि। गणेश जी के प्रसिद्ध द्वादश नाम स्तोत्र, संकट नाशक स्तोत्र, गणपति अथर्वशीर्ष, गणेश कवच, शतनामस्तोत्र आदि का पाठ करने से मनवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

गणेश को एक अनार्य देवता माना जाता है क्योंकि उनका शरीर बहुत छोटा है जो यक्षों तथा शिवगणों के समान है। गणेश जी का व्यापक मस्तक ज्ञान का प्रतीक है। भगवान गणेश जी के बड़े बड़े कान बेहतरीन श्रवण शक्ति के प्रतीक हैं। गणपति जी की छोटी छोटी आंखें प्रगाढ़ एकाग्रता को दर्शाती हैं। इनकी लंबी सूंड कार्यकुशलता की प्रतीक है। गणेश जी का बड़ा सा पेट दर्शाता है कि जीवन में प्राप्त होने वाली समस्त अच्छी-बुरी चीजों को सहजता से ग्रहण किया जाए। गणेश जी की छोटी छोटी टांगे सहनशीलता और शक्ति की ओर इशारा करती हैं।

गणेश जी की कान्ति उदयकालीन सूर्य के समान उज्ज्वल है। नाग गणेश जी के आभूषण एवं यज्ञोपवीत के प्रयोग में लाए जाते हैं। उनकी कमर में लिपटा सांप ऊर्जा का संचार करता है। परशुराम जी ने युद्ध के दौरान भगवान गणेश का एक दांत तोड़ दिया था तभी से उन्हें एकदंत कहा जाता है। एकदंत से शिक्षा मिलती है कि बुरी चीजों को त्याग कर अच्छी चीजों को ग्रहण करें।

बिगड़े काम बनाने के लिए बुधवार को गणेश मंत्र का स्मरण करें-

त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।

नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।

धन की कामना के लिए बुधवार के दिन श्री गणेश को घी और गुड़ का भोग लगाएं। थोड़ी देर बाद घी व गुड़ गाय को खिला दें। ये उपाय करने से धन संबंधी समस्या का निदान हो जाता है।

घर के मुख्य दरवाजे पर गणेशजी की प्रतिमा लगाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कोई भी नकारात्मक शक्ति घर में प्रवेश नहीं कर पाती। इसलिए घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी की प्रतिमा लगानी चाहिए।

मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी के कानों में अपनी मनोकामना कहने से वह अवश्य पूर्ण होती है।

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