कृष्णावतार

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Wednesday, January 08, 2014-8:04 AM

इसके बाद एक दिन शम्भर के साथ प्रद्युम्न जी का युद्ध हुआ। दानव राज शम्भर इस युद्ध में मारा गया। प्रद्युम्न जी मायावती को साथ लेकर द्वारिका लौट आए। (श्री के.एम. मुंशी प्रद्युम्न जी और मायावती की पौराणिक कथा से दूर चले गए हैं जबकि शिवपुराण और देवी भागवद् में यह कथा इस प्रकार है-)
  
तारक आदि दैत्यों का अत्याचार बहुत बढ़ गया। उन्हें ब्रह्मा जी का वरदान मिला हुआ था। इस कारण कोई देवता दैत्य या दानव उनका वध नहीं कर पाता था। यह दैत्य त्रिपुरी के राजा थे। आजकल की खोज के अनुसार त्रिपुरी आजकल का त्रिपोली प्रदेश था जो अफ्रीका का बिल्कुल उत्तरी इलाका है। भगवान विष्णु ने देवताओं को बताया कि शिव जी यदि अपनी तपस्या त्याग कर विवाह कर लें और पुत्र उत्पन्न करें तो उनका वह पुत्र ही इन दैत्यों का वध कर सकेगा।
  
सती दाह के पश्चात भगवान भोले नाथ समाधि में बैठ गए थे। किसी देवता की क्या मजाल जो उनकी समाधि को भंग कर डाले। इंद्र ने जैसे-तैसे कामदेव को इस काम के लिए सहमत किया। मदन अपना धनुष और पांचों बाण लेकर वहां पहुंचा। हिमालय पर्वत की बर्फ की मोटी तह से ढकी हुई चोटी पर उसके पीले बाण ने सुंदर बागीचा लगा दिया। फूल खिल उठे।
                                                                                                                                                                            (क्रमश:)

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