अपना स्वयं का हित चाहने वालों को...

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Thursday, January 09, 2014-7:43 AM
देव कार्य एवं देव पूजा जहां मनुष्य के लिए सुख-शान्ति का आधार माने जाते हैं, वहीं कभी-कभी कुछ गलत कार्यों के द्वारा उसका विपरीत प्रभाव परिवार एवं स्वयं पर पड़ने से जातक दुखी और अशान्त हो जाते हैं। अपना स्वयं का हित चाहने वालों को

1 गीले वस्त्रों को पहनकर अथवा दोनों हाथ घुटनों से बाहर करके जो जप होम और दान किया जाता है वह सब निष्फल हो जाता है।

2 बाल खोलकर आचमन और देवपूजन नहीं करना चाहिए।

3 घर में दो शिवलिंग, तीन गणेश, दो शंख, दो सूर्य प्रतिमा, तीन देवी प्रतिमा, दो गोमती चक्र और दो शाल ग्राम का पूजन नहीं करना चाहिए। इनका पूजन करने से गृह स्वामी को दुख अशांति की प्राप्ति होती है।

4 आधुनिक जीवन शैली के चलते आज कोई भी शुभ कार्य करने से पूर्व मूहूर्त निकलवाने को महत्व नहीं दिया जाता। इन मूहूर्त विधानों की उपेक्षा कर अपनी-अपनी सुविधानुसार कार्य करने का ही फल है कि आज के अधिकतम मानव दुखी देखे जाते हैं।

5 घर में रहकर भी वैराग्य धारण किया जा सकता है। क्या यह संभव है अगर घर ही अशुभ होगा, गलत ढंग से निर्मित होगा तो उसमें धर्म, ध्यान एवं संयम-वैराग्य आदि के प्रशस्तकार्य कैसे संभव हो सकेंगे ? इस दृष्टि से ‘घर’ को शास्त्र की मर्यादा के अनुसार शुभकारक बनाने के लिए वास्तुशास्त्र में सांसारिक उपयोग के भवनों की भूमि एवं निर्माण कार्य-संबधी नियमावली का पालन करें।

6 अपने घर के विभाग इस प्रकार बनाएं पूर्व दिशा की ओर ड्राइंग-रूम, आग्नेय दिशा में रसोई, दक्षिण दिशा में शयन करने का स्थान, नैऋत्य दिशा में आयुधशाला, पश्चिम दिशा में भोजनगृह, वायव्य दिशा में धन संग्रह करने का घर, उत्तर दिशा में जल स्थान और ईशान दिशा में देवस्थान बनाएं।


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