मालामाल करते हैं ये शनि मंत्र

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Saturday, January 11, 2014-7:36 AM
स्कंद पुराण के काशी खण्ड में वर्णित है कि शनिदेव ने अपने पिता भगवान सूर्य देव से विनय करते हुए कहा, "मैं उस पद तक पहुंचना चाहता हूं जो पद आज तक कभी किसी को प्राप्त न हुआ हो, मेरा मंडल आपके मंडल से सात गुना अधिक बड़ा हो और मुझ में इतना वेग हो की उसका कोई सामना न कर पाए चाहे वह देव, असुर, दानव, ही क्यों न हों?"

शनिदेव का प्रश्न सुन कर भगवान सूर्य देव बहुत खुश हुए और बोले, " इस पद की प्राप्ति के लिए आपको काशी जा कर भगवान शिव जी को प्रसन्न करना होगा।"

अपने पिता से अनुमति लेकर शनि देव उनकी आज्ञा के अनुसार काशी गए और भगवान शिव जी को खुश करके ग्रहत्व प्राप्त कर नव ग्रह मंडल में स्थान प्राप्त किया।

शनि के अधिदेवता प्रजापति ब्रह्मा और प्रत्यधिदेवता यम हैं। इनका रंग रूप श्यामल, वाहन गिद्ध तथा रथ लोहे स् निर्मित है। यह प्रत्येक राशि में तीस महीने तक निवास करते हैं। यह मकर और कुम्भ राशि के स्वामी हैं तथा इनकी महादशा 19 वर्ष की होती है।

शनिदेव की शांति के उपाय

1 महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें

2 ब्राह्मण को तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काला वस्त्र, नीलम, काली जौ, जूता, कस्तूरी और सुवर्ण का दान करें।

3 मालामाल करते हैं ये शनि मंत्र

ॐ धनदाय नम:

ॐ मन्दाय नम:

ॐ मन्दचेष्टाय नम:

ॐ क्रूराय नम:

ॐ भानुपुत्राय नम:

4 मंत्र स्मरण के उपरांत शनि देव को धूप व सरसों के तेल का दीपक जला कर आरती करें।


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