जानिए, विश्व के सातों आश्चर्यों की प्रसिद्धि का क्या है राज़

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Wednesday, January 22, 2014-8:41 AM
 विश्व के सातों आश्चर्य अपनी उत्तर दिशा की वास्तु अनुकुलता के कारण ही प्रसिद्ध हैं। समस्त आश्चर्यों की उत्तर दिशा में गहरी नीचाई है और ज्यादातर आश्चर्यों की उत्तर दिशा में पानी है जैसे ताज महल की उत्तर दिशा में यमुना नदी और पैरिस के एफिल टावर की उत्तर दिशा में सान नदी बह रही है। मिस्र के गीजा पिरामीड की उत्तर दिशा में गहरी नीचाई के साथ पूर्व दिशा में नील नदी बह रही है।

विश्व का सबसे धनी एवं प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ईसाईयों की पवित्र नगरी वेटिकन सिटी की इस स्थिति में भी उत्तर एवं पूर्व दिशा में बह रही टिब्बर नदी की अहम भूमिका है। इसा प्रकार भारत के पहले और विश्व के दूसरे नम्बर के धनी प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तिरूपति बाला जी की उत्तर दिशा में बड़े आकार का स्वामी पुष्यकरणी कुण्ड के साथ साथ उत्तर पूर्व दिशा एवं ईशान कोण में तीखा ढलान है और दक्षिण पश्चिम दिशा में ऊंचाई है।

जम्मू कटरा स्थित वैष्णों देवी मंदिर एवं शिर्डी स्थित साई बाबा के मंदिर की उत्तर दिशा में भी नीचाई है। हरिद्वार स्थित हरकी पौड़ी की प्रसिद्धि का कारण दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर नीचाई तथा पश्चिम दिशा के पहाड़ की ऊंचाई और पूर्व दिशा में बह रही गंगा नदी की नीचाई है। मदुरै स्थित मिनाक्षी मंदिर को उत्तर दिशा में बहने वाली वैगै नदी के कारण ही प्रसिद्धि मिली है।

इसी प्रकार दक्षिण भारत के सभी प्रसिद्ध मंदिरों जैसे रामेश्वरम, गुरूवयुर मंदिर त्रिशुर, कण्ठेश्वरा मंदिर नंजनगुड मैसुर, श्री रंगनाथ स्वामी श्री रंगपत्तनम, पद्मनाभ स्वामी मंदिर त्रिरूअन्नतपुरम्, सुचीद्रम टेम्पल कन्याकुमारी, वडक्कनाथ मंदिर त्रिशुर इत्यादि मंदिरों में उत्तर दिशा में पानी के कुण्ड हैं या नदी बह रही है।

जयपुर स्थित आमेर का किला, हैदराबाद स्थित गोलकुंडा फोर्ट की प्रसिद्धि में भी उत्तर एवं पूर्व दिशा की नीचाई और वहां पानी का जमाव ही उन्हें प्रसिद्धि दिलाने में सहायक हो रहा है। इसी प्रकार चंडीगढ़ की प्रसिद्धि ईशान कोण स्थित सुखना लेक और जयपुर की प्रसिद्धि में ईशान कोण स्थित जलमहल तालाब के कारण है।


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