मां महागौरी की पूजा धन, वैभव और सुख शांति प्रदान करती है

  • मां महागौरी की पूजा धन, वैभव और सुख शांति प्रदान करती है
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Friday, January 24, 2014-8:25 AM
 

मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से आठवीं शक्ति का नाम है महागौरी। महागौरी का गौर वर्ण है इसलिए इनका नाम गौरी पड़ा। इस गौरता की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है-

‘अष्टवर्षा भवेद् गौरी।’

इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय-मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशुल है। ऊपर के बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बायें हाथ वर-मुद्रा में है। इनकी मुद्रा अत्यन्त शांत है। इनकी शक्ति अमोघ और फलदायिनी है।

जब महागौरी ने पार्वती का रूप धारा तो भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। इनकी प्रतिज्ञा थी कि

‘व्रियेऽहं वरदं शम्भुं नान्यं देवं महेश्वरात्‌।’

इस कठोर तपस्या के कारण इनका शरीर एकदम काला पड़ गया। इनकी तपस्या से प्रसन्न और संतुष्ट होकर जब भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा जी के पवित्र जल से मल कर धोया तब वह विद्युत प्रभा के समान अत्यंत कांतिमान-गौर हो उठा। तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा।

मां महागौरी का ध्यान-स्मरण, पूजन-आराधना भक्तों के लिये सर्वविध कल्याणकारी है। जो स्त्री महागौरी की पूजा भक्ति भाव से करती है, वह सदा सुहागन रहती है। अविवाहित कन्या मां का पूजन करे तो उसे योग्य एवं मनभावन वर प्राप्त होता है। पुरूष मां का पूजन करें तो उनका जीवन सुखमय व्यतीत होता है। देवी उनके पापों को जला कर भस्म कर देती हैं और शुद्ध अंत:करण प्रदान करती हैं।

इनकी पूजा अर्चना से समस्त कष्ट दूर होते हैं तथा अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। मान्यता है की महागौरी के ध्यान मंत्र का जाप करने से अविवाहितों का विवाह होने में आने वाली समस्त बाधाओं का नाश होता है। घर बनवाने में आ रही अड़चनें हो या फिर नौकरी और रोजगार की परेशानियां व बाधाएं सभी से मुक्ति मिलती है।

महागौरी का ध्यान -

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥ पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्। वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥ प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्। कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥

महागौरी का स्तोत्र पाठ-

सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्। ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥ सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्। डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥ त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्। वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

महागौरी का कवच मंत्र-

ओंकारः पातु शीर्षो मां, हीं बीजं मां, हृदयो। क्लीं बीजं सदापातु नभो गृहो च पादयो॥ ललाटं कर्णो हुं बीजं पातु महागौरी मां नेत्रं घ्राणो। कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा मा सर्ववदनो॥ मंत्र- ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे नम:। ऊँ महागौरी देव्यै नम:। महागौरी की आरती- जै माहांगौरी जगत की माया जै उमा भवानी जय महांमाया|| हरिद्वार कनखल के पासा| महांगौरी तेरा वहा निवासा|| चन्द्रकली और ममता अम्बे| जै शक्ति जै जै मां जगदम्बे|| भीमा देवी विमला माता| कौशकी देवी जग विख्याता|| हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा| महांकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा|| सती सत हवन कुण्ड में था जलाया| उसी धुएं ने रूप काली बनाया|| बना धर्म सिंह जो सवारी में आया| तो संकर ने त्रिशूल अपना दिखाया|| तभी मां ने महांगौरी नाम पाया| शरण आने वाले का संकट मिटाया|| शनिवार को तेरी पूजा जो करता| मां बिगङा हुआ काम उसका सुधरता|| चमन बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो| महांगौरी मां तेरी हरदम ही जय हो||


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