क्या आपका जीवन भाग्य के हाथों में है?

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Friday, January 24, 2014-8:12 AM

जब इंसान को किसी अन्य इंसान की अच्छाइयों और उसकी खूबियों के बारे में जानकारी मिले और उन्हें सुनकर उसे खुशी होती है तो वहां प्रेम अपने आप ही प्रकट हो जाता है। प्रेम धीरे-धीरे बढ़े और निरंतर बढ़ता रहे तो हमेशा प्रेम बना रहता है। प्रेम भीड़ का विषय नहीं है, एकांत की अनुभूति है। प्रेम को कभी भीड़ में महसूस नहीं किया जा सकता। उसे तो सिर्फ एकांत में ही अपने भीतर उतारा जा सकता है।

हमारे हाथों का बहुत महत्व है जीवन में। ये पुरुषार्थ के प्रतीक हैं। भाग्य हाथों में ही लिखा होता है और हाथों से ही बदला भी जा सकता है। शास्त्रों ने हाथों का बहुत महत्व बताया है। अहंकार कहता है कि भुजा देखो लेकिन शास्त्र कहता है कि हाथों को देखो कि उन्होंने इस संसार में किया क्या है।

अयमे हस्तो भगवान...,
कराग्रे वसते लक्ष्मी कर मुले सरस्वती,
कर मध्ये तू गोविंद :, प्रभाते कर दर्शनं।।


अर्थ : हाथों के आगे के भाग में लक्ष्मी का वास होता है, आखिरी हिस्से में सरस्वती और हथेली के बीच में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण विराजते हैं। अत: सभी को सुबह जागते ही अपनी हथेलियों के दर्शन करने चाहिए।

मनुष्य को अपने धर्म और समाज की भाषा को हमेशा आदर देना चाहिए। असत्य और निंदा के समान कोई पाप नहीं हो सकता इसलिए जीवन में कभी भी असत्य के सहारे नहीं चलना चाहिए।

 


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