सूर्य देव की पूजा से रोगों से लड़ने की शक्ति का विकास होता है

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Sunday, January 26, 2014-7:27 AM

गृह नक्षत्र मानव जीवन पर अपना शुभ अथवा अशुभ प्रभाव डालते हैं। अशुभ नक्षत्रों को शुभ करने के लिए नक्षत्रों की शान्ति के उपाय किए जाते हैं। अगर किसी जातक का जन्म गण्डमूल, गण्डान्त, अभुक्तमूल आदि में हुआ हो तो किसी वशिष्ठ विद्वान से परामर्श लेने के उपरांत सूर्य देव की पूजा अथवा शान्ति विधान कराना चाहिए। किन्हीं परिस्थितियों में जन्म कुण्ड्ली में वयाप्त सूर्य ग्रह पीडा दे रहें हों तो...
 
1 सुबह प्रात: उठ कर नित्य कर्म से निर्वत होकर स्नान स्नान करते वक्त जल में खसखस, लाल फूल अथवा केसर डालने के पश्चात स्नान करें। इस उपाय से रोगों से लड़ने की शक्ति का विकास होता है।

2 मनवांछित फलों की प्राप्ति के लिए तांबा, गुड, गेहूं, मसूर दाल का दान करें। यह दान प्रत्येक रविवार, सूर्य संक्रान्ति एवं सूर्य ग्रहण के दिन करें।

3 सूर्य देव के मन्त्रों का जाप करते समय शुद्धता का पूरा ध्यान रखें। सूर्य देव को अपने प्रत्यक्ष अनुभव करते हुए एकाग्रता बनाएं रखें तथा जाप करते समय बीच में उठना नहीं चाहिए। सूर्य देव का मन्त्र है

"ऊँ घृ्णि: सूर्य आदित्य: "

इस मन्त्र का जाप हर रोज भी किया जा सकता है मगर रविवार के दिन इस जाप का विशेष महत्व है। जाप करने पर मंत्रों की संख्या कम से कम 10, 20, या 108 रखें
इस संख्या को बढाया भी जा सकता है।

4 सूर्य हवन करते समय उपरोक्त मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी होता है।

5 कलाई में मोली (कलावा) को छः बार लपेटकर बांधें।

6 लाल गाय को रविवार की दोपहर में दोनों हाथों से गेहूं भरकर खिलाएं।

7 तांबे का कड़ा दाहिने हाथ में पहनें।






 


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