ऐसे लोगों का शनि देव 100 जन्मों तक पीछा करते हैं

  • ऐसे लोगों का शनि देव 100 जन्मों तक पीछा करते हैं
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Saturday, February 01, 2014-10:07 AM

नीलांजनं समाभासं रविपुत्रं यमाग्रज:।
छायामार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चर:॥


पुराणों के मतानुसार शनि देव को परमशक्ति परमपिता परमात्मा ने सभी लोकों का न्यायाधीश बनाया है। शनिदेव त्रिदेव और ब्रह्मांड निवासियों में बिना किसी भेद के   उनके किए कर्मों की सजा उन्हें देते हैं।

पुराणों के मतानुसार शराब का सेवन करने वाले, मांस भक्षण करने वाले, ब्याज लेने वाले, परस्त्री संग एवं व्यभिचार करने वाले और अपनी ताकत के बल पर किसी के साथ अन्याय करने वाले का शनि देव 100 जन्मों तक पीछा करते हैं और उसे उसके कर्मों के अनुरूप फल देते हैं।

शनि को देव भी माना जाता है और ग्रह भी। जब हनुमान जी ने धरती पर अवतार लिया उस समय शनि नाम के एक जातक हुए हैं जिनके चरित्र के आधार पर ही शनि  के चरित्र का निर्माण माना जाता है। जैसे हनुमान जी को मंगल ग्रह का अधिपति देवता माना जाता है। उसी तरह शनि देव को भी शनि ग्रह का अधिपति देवता माना जाता है। सनातन धर्म में दोनों ही पूजनीय हैं।

ज्योतिषियों के मतानुसार शनि मकर और कुम्भ राशि के अधिपति स्वामी हैं तथा इनकी महादशा 19 वर्ष तक रहती है। तेल और लौह तत्व पर इनका वर्चस्व स्थापित  है। मनुष्य की काया में दांत, बाल और हड्डियों की जो भी स्थिति होती है उस का मूल प्रभाव शनि देव की शुभ अशुभ दृष्टि पर ही निर्भर करता है।

खगोल विज्ञान के मतानुसार शनि का व्यास 120500 किमी, 10 किमी प्रति सेकंड की औसत गति से यह सूर्य से औसतन डेढ़ अरब किमी की दूरी पर रहकर यह ग्रह 29 वर्षों में सूर्य का चक्कर पूरा करता है। गुरु शक्ति पृथ्वी से 95 गुना अधिक और आकार में बृहस्पति के बाद इसी का नंबर आता है। अपनी धुरी पर घूमने में यह ग्रह नौ घंटे लगाता है। शनि धरातल का तापमान 240 फेरनहाइट है। शनि के चारों ओर सात वलय हैं, शनि के 15 चन्द्रमा हैं जिनका प्रत्येक का व्यास पृथ्वी से काफी अधिक है।


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