बसंत पंचमी पर खुलते हैं मुक्ति के द्वार

  • बसंत पंचमी पर खुलते हैं मुक्ति के द्वार
You Are HereDharm
Tuesday, February 04, 2014-4:57 PM

जीवन में परिवर्तन अति आवश्यक है। वसंत ऋतु परिवर्तन की द्योतक है इसलिए इस ऋतु के आगमन को वसंत पंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। शीत ऋतु से जड़त्व को प्राप्त हुई प्रकृति वसंत ऋतु के आगमन से चेतनता को प्राप्त हो जाती है। प्रकृति का माधुर्य वातावरण में नई उमंग तथा नवविचार का सृजन करता है।
 
प्रकृति अपने मनमोहक रूप को धारण करती है जो कि मानसिक एवं शारीरिक बलिष्ठता प्रदान करने वाला होता है। वसंत पंचमी का पर्व सांस्कृतिक, भौगोलिक तथा ऐतिहासिक इत्यादि सभी दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्व का पर्व है। विद्या की देवी मां सरस्वती का जन्म दिवस वसंत पंचमी है।

मां भगवती सरस्वती समस्त अविद्या तथा जड़ता को हरने वाली हैं। विद्या आरंभ हेतु सभी के लिए मां सरस्वती का पूजन परम आवश्यक है। वाणी, बुद्धि, विद्या और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना तो भगवान अच्युत, ब्रह्मा जी तथा भगवान शंकर भी करते हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार मां सरस्वती भगवान श्री कृष्ण जी के कंठ से प्रकट हुईं तथा श्वेत व तथा हाथों में सदैव वीणा धारण किए रहती हैं। पुराणों में कहा गया है कि सरस्वती से खुश होकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें यह वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन उनकी आराधना की जाएगी।

या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


अर्थात : जो देवी सर्व भूतों में विद्या रूप से स्थित हैं उन आद्या शक्ति को नमस्कार है, नमस्कार है, नमस्कार है।

वसंत पंचमी पर्व में पीले रंग का बहुत महत्व है। भगवान श्री कृष्ण जी को पीत व बहुत प्रिय हैं तथा वह स्वयं श्री गीता जी में कहते हैं कि ऋतुओं में वसंत ऋतु मैं हूं। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है। पीला रंग बुद्धि का परिचायक है। इस दिन लोग अपने घरों को पीले फूलों से सजाते और पीले रंग के परिधान पहनते हैं। वैसे इस पर्व का सनातन नाम श्रीपंचमी है, वसंत पंचमी नहीं।

यह पर्व लक्ष्मी की आराधना का पर्व भी है क्योंकि पुराणों के अनुसार इसी दिन सिंधुसुता रमा ने विष्णु के कंठ में जयमाला डालकर उनका वरण किया था। इस प्रकार यह सृष्टि के पालक और वैभव की शक्ति के विवाह तथा मिलन का महोत्सव भी है। इसी दिन प्रतिभा का नवोन्मेष हुआ और पुरुष वैभव के सौंदर्य और सौष्ठव से अलंकृत हो उठा। रमा और विष्णु का विवाह अर्थात सौंदर्य, संपत्ति तथा सुषमा द्वारा पालक तत्व का वरण जिसके परिणामस्वरूप अंतर का उल्लास सहसा ही उच्छलित होने लगा।

वसंत पंचमी सांस्कृतिक सौहार्द का पर्व है। प्रकृति की आलौकिक सुंदरता से अभिभूत सभी जीव-जंतु इस ऋतु की स्वर लहरियों में खो जाते हैं। विद्या बुद्धि तथा ओजस्वी वाणी प्रदान करने वाली आद्या शक्ति मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर सभी विद्याओं तथा कलाओं में निपुणता प्राप्त कर सकते हैं जिनकी आराधना कर सभी ऋषि-मुनि मुक्ति द्वार तक पहुंचे।


                                                                                                                                                          —रवि शंकर शर्मा, जालंधर


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You