ऐसे घर में भूत-प्रेत और मानसिक परेशानियों का निवारण स्वयं ही हो जाता है

  • ऐसे घर में भूत-प्रेत और मानसिक परेशानियों का निवारण स्वयं ही हो जाता है
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Wednesday, February 05, 2014-8:01 AM

सनातन धर्म में मौजूद तैंतीस करोड़ देवी देवताओं में श्री गणेश का महत्व सबसे विलक्षण है। किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में, किसी भी देवता की आराधना के पूर्व, किसी भी सत्कर्मानुष्ठान में, किसी भी उत्कृष्ट से उत्कृष्ट एवं साधारण से साधारण लौकिक कार्य में सर्व प्रथम भगवान गणेश का स्मरण, अर्चन एवं वंदन किया जाता है।  

ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार, भगवान गणेश को अनेकों रूपों में पूजा जाता है जैसे- लंबोदर, शूपकर्ण, एकदंत, हरिद्रा गणेश, दूर्वा गणेश,शमी गणेश, गोमेद गणेश आदि।  भगवान गणेश की उपासना अनेक प्रकार से होती है। श्री गणेश स्वरूप के अलग-अलग रूपों की अर्चना का विधान भी अलग-अलग होता है।  भगवान गणेश के हर स्वरूप का अपना एक अलग महत्व है।

वास्तु शास्त्र के मतानुसार घर के प्रवेश द्वार पर भगवान गणेश का चित्र अथवा स्वरूप लगाना बहुत शुभ प्रभाव देता है। उस घर की रक्षा स्वंय श्री गणेश करते हैं। वहां नकारात्मक उर्जा का प्रवेश नहीं हो पाता। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश ही लगातार होता रहता है। घर पर आने वाले समस्त विध्नों का नाश विध्नहरता करते हैं। समस्त काम उनकी कृपा से संपन्न होते जाते हैं।

कामना भेद से भी इनके भिन्न रूपों की उपासना की जाती है जैसे संतान प्राप्ति हेतु संतान गणपति, विद्या प्राप्ति हेतु विद्या गणपति आदि। वास्तु शास्त्रियों का मानना है जिस घर में नाचते हुए गणेश जी स्थापित हो उस घर में शारीरिक-व्याधियां, घर में भूत-प्रेत, आपदा की बाधाएं, मानसिक परेशानियां आदि का निवारण स्वयं ही हो जाता है क्योंकि इस रूप में गणपति बप्पा प्रसन्नचित नज़र आते हैं।

देखने में गणपति बप्पा का यह रूप आकर्षित तो करता ही है, इनका प्रभाव भी बेहद चमत्कारी होता है। इनकी स्थापना से घर में सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली और घर में पॉजिटिव शक्तियों का समावेश होता है। इसलिए गणेश जी की यह तस्वीर घर में उस स्थान पर लगानी चाहिए जहां सबकी नज़र बार- बार पड़ती रहे।


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