घर में ईश्वरीय शक्तियों के प्रवेश से खोलें किस्मत का ताला

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Sunday, February 09, 2014-7:54 AM

सनातन धर्म में व्रत व पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। यह हमारे रीति-रिवाज व परंपरा के द्योतक है। पूजा-पाठ करने से पूर्व सिर पर पल्लू, हाथों में पूजन सामग्री और समर्पण भाव से झुकी हुई आंखें रखना हमारी विरासत है, जिसकी जिम्मेदारी विशेष रूप से घर की महिलाएं संभालती हैं।

जब आप किसी कारणवश मानसिक रूप से कमजोर पड़ जाते हैं अथवा घर में क्लेश, रोग या आर्थिक तंगी से परेशान होते हैं तो उस समय जादू टोने तंत्र मंत्र में पड़ने से बेहतर है भगवान की शरण में जाएं। पूजा-पाठ से समस्त कार्यों के अच्छा होने की उम्मीद जाग जाती है। भक्ति में बड़ी शक्ति है अवश्यकता है तो केवल विश्वास रखने की। यही विश्वास घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच पूजन करने को विवश करता है। जब किसी भौतिक समस्या का निदान हम अपने प्रयासों से नहीं ढूंढ़ पाते तब पूजा-पाठ ही आखिरी रास्ता बचता है। यह महज धारणा नहीं, बल्कि हकीकत है।

 घर में देवालाय वास्तु शास्त्र के अनुरूप हो तो अत्यन्त शुभ फल प्रदान करता है और देवालाय के माध्यम से आपकी किस्मत का ताला भी खुल जाता है। देवालाय पूर्वी या उत्तरी ईशान कोण में बनाएं क्योंकि ईश्वरीय शक्तियां ईशान कोण से प्रवेश करती हैं और नैऋत्य कोण पश्चिम-दक्षिण से बाहर निकलती है। इसका एक हिस्सा शरीर द्वारा ग्राह्य बायोशक्ति में बदलकर जीवनोपयोगी बनता है।

 वास्तुशास्त्र प्रकृति से पूर्ण लाभ प्राप्त करने की व्यवस्था करता है न कि भाग्य को बदलने की। पूजा-पाठ करते समय जातक का मुंह पश्चिम दिशा में होना शुभ फलदायी होता है इसके लिए पूजा स्थल का द्वार पूर्व की ओर होना चाहिए। शौचालय तथा पूजा घर पास-पास नहीं होना चाहिए। जब भी आपका मन अशांत हो, यहां आकर आप नई ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं। कर्मों का फल शुभाशुभ जैसा भी हो हमें भोगना अवश्य पड़ेगा। इतना है कि सुकर्म कष्ट को कम कर देते हैं।

 


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