ऐसे अपराधियों को परलोक में भी यश नहीं मिलता

  • ऐसे अपराधियों को परलोक में भी यश नहीं मिलता
You Are HereDharm
Sunday, February 09, 2014-8:58 AM

श्री गुरुग्रंथ साहिब

तै नर किआ पुरानु सुनि कीना, अनपावनी भगति नही उपजी भूखै दानु न दीना।।

कामु न बिसरिओ क्रोधु न बिसरिओ लोभु न छूटिओ देवा, पर निंदा मुख ते नही छूटी निफल भई सभ सेवा।।

बाट पारि घरु मूसि बिरानो पेटु भरै अप्राधी, जिहि परलोक जाइ अपकीरति सोई अबिदिआ साधी।।

हिंसा तउ मन ते नही छूटी जीअ दइआ नही पाली, परमानंद साधसंगति मिलि कथा पुनीत न चाली।।

स्वामी परमानंद जी के अनुसार काम, क्रोध और लोभ की निंदा की गई है। ऐसे अपराधियों को परलोक में भी यश नहीं मिलता है।

मन करि कबहू न हरि गुन गाइओ, बिखिआसकत रहिओ निसि बासुर कीनो अपनो भाइओ।।

गुर उपदेसु सुनिओ नहि काननि पर दारा लपटाइओ, पर निंदा कारनि बहु धावत समझिओ नह समझाइओ।।

 कहा कहउ मै अपुनी करनी जिह बिधि जनमु गवाइओ, कहि नानक सभ अउगन मो महि राखि लेहु सरनाइओ।।

गुरु नानक देव जी ने कहा है कि प्रभु को याद नहीं करने, अपनी मर्जी से चलाने, पराई स्त्रियों पर नजर रखने और समझाने पर भी नहीं समझने वाले मनुष्य अपने कर्म से जन्म गंवा रहे हैं।

हे कामं नरक बिस्रामं बहु जोनी भ्रमावणह, चित हरणं त्रै लोक गंम्हं जप तप सील बिदारणह ।।

अलप सुख अवित चंचल ऊच नीच समावणह,  तव भै बिमुंचित साध संगम ओट नानक नाराइणह ।।

वासना में मनुष्य नरक की ओर जाता है। थोड़े सुख के लिए ऊंचा व्यक्ति भी नीचा हो जाता है और उसका जप, तप, शील खत्म होता है।
 
                                                                                         - ज्ञानी गुरमीत सिंह, गुरुद्वारा चांदी की टकसाल, जयपुर


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You