अब तक भगवान श्री विष्णु ने कब और कितने अवतार धारण किए हैं

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Tuesday, February 11, 2014-7:27 AM

श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि वह धर्म की रक्षा के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं। आज तक जगत पालक भगवान विष्णु अपने भक्तों की रक्षा के लिए नौ बार धरती पर अवतरित हो चुके हैं और दसवीं बार अभी होंगे। भगवान विष्णु के दशावतारों के विषय में तो जन मानस को ज्ञात है लेकिन इसके अतिरिक्त भी विष्णु अवतार बहुत से रूपों में अवतरित हुए हैं।

श्री कृष्ण के दशावतार


1 मत्स्य अवतार

2 कुर्मा अवतार

3 वराह अवतार

4 नर-सिहं अवतार

5 वामन अवतार

6 परशुराम अवतार

7 राम अवतार

8 कृष्ण अवतार

9 बुद्ध अवतार

10 कलकी अवतार

अन्य अवतार

1 भगवान विष्णु के सर्वप्रथम अवतार  सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार

2 श्री विष्णु ने भगवान ब्रह्मा के पुत्र धर्म के घर नर-नारायण रूप में जन्म लिया एवं महाभारत में कृष्ण और अर्जुन को नर-नारायण का अवतार माना गया है।

3 धर्म ग्रंथों के मतानुसार देवर्षि नारद श्री विष्णु के ही अवतार हैं। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने देवर्षि नारद की महत्ता को स्वीकार करते हुए कहा है कि देवर्षियों में मैं ही नारद हूं।

4 कपिल मुनि के रूप में जब भगवान ने अवतार लिया तो वो भागवत धर्म के प्रमुख बारह आचार्यों में से एक थे। वे सांख्य दर्शन के प्रवर्तक हैं।

5 पतिव्रता माता अनुसूइया के पतिव्रत धर्म से खुश होकर त्रिदेव ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनके गर्भ से पुत्ररूप में जन्म लेंगे। तब ब्रह्मा जी के अंश से चंद्रमा, शंकर जी के अंश से दुर्वासा और विष्णु जी के अंश से दत्तात्रेय का जन्म हुआ।

6 मनु जी के वंश में वेन नामक नास्तिक राजा का जन्म हुआ। महर्षियों ने अपने हाथों उसका वध कर दिया। वंशावृद्धि के लिए राजा वेन की भुजाओं का मंथन किया गया जिससे पृथु नामक पुत्र का जन्म हुआ। पृथु के दाहिने हाथ में चक्र और चरणों में कमल का चिह्न देखकर ऋषि भांप गए की यह भगवान श्री हरि का ही अवतार हैं।

7 जब समुद्र मंथन हुआ तो औषधियों के स्वामी भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए। उन्हें भी भगवान विष्णु का अवतार माना गया है।

8 समुद्र मंथन में निकले अमृत को लेकर जब असुर व देवता आपस में लड़ने लगे तो भगवान श्री विष्णु ने मोहिनी अवतार धारण किया।

9 तालाब में पानी पीने आए एक हाथी का पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया और पानी के अंदर वह उसे अपनी ओर खींचने लगा। बहुत संघर्ष करने के उपरांत भी जब गजेंद्र स्वयं को बचा न पाया तो भगवान का ध्यान करने लगा। उसकी स्तुति सुनकर भगवान प्रकट हुए और उन्होंने अपने चक्र से मगरमच्छ का वध कर दिया।

10 पुराणों के मतानुसार महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु का ही रूप हैं। भगवान व्यास नारायण के कलावतार थे। वेदों के ज्ञाता एवं रचियता होने के कारण इनका नाम वेदव्यास पड़ा।

11 धर्म ग्रंथों के मतानुसार मधु और कैटभ नामक दो शक्तिशाली दैत्य वेदों को चोरी कर पाताल में चले गए। उस समय भगवान ने हयग्रीव अवतार धारण किया और मधु-कैटभ का वध कर वेदों को सुरक्षित भगवान ब्रह्मा को लौटा दिया।

12 सनकादि और भगवान ब्रह्मा मनुष्य का मोक्ष किस प्रकार हो इस विषय पर वार्तालाप कर रहे थे। उसी समय वहां भगवान विष्णु हंसावतार के रूप में अवतरित हुए और उन्होंने सनकादि मुनियों का संदेह दूर किया।
 


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