जीवन को आनंदमय करने का सरल उपाय...

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Wednesday, February 12, 2014-7:54 AM

पुरुष मन से इंद्रियों को वश में रख कर अनासक्त भाव से सभी इंद्रियों को कर्मयोग (निष्काम कर्म) में लगाता है वही श्रेष्ठ है। जीवन को आनंदमय करने का सरल उपाय है संसार के प्रति अपनी आसक्ति को कम करते जाना। जब हम अनासक्त भाव से कार्य करते हैं तो वह कर्मयोग कहलाता है और आसक्ति से करते हैं तो वह कर्मभोग होता है। कर्मयोग में हम कर्म करते हुए अपनी चेतना से जुड़े रहते हैं।

इसके लिए अपने मन में थोड़ा भाव बदलना होता है कि मेरे द्वारा किए गए सभी कार्य प्रभु की सेवा है। मेरा अपना कोई स्वार्थ नहीं, जो कार्य सामने आता है वह करता हूं। इंद्रियों से कार्य लेता हूं, मन में उसका चिंतन नहीं करता।

असल में इंद्रियों की विषयों से आसक्ति नहीं होती, इंद्रियां तो माध्यम हैं। आसक्ति तो मन से होती है और मन उसको पूरा करने के लिए इंद्रियों का सहारा लेता है। इंद्रियों को वश में करने के लिए मन को काबू में किया जाता है। मन के नियंत्रण में होने से इंद्रियां स्वयं काबू में आ जाती हैं, जैसे शूगर की बीमारी में व्यक्ति मन से जीभ को काबू कर मीठा नहीं खाता वैसे ही सभी इंद्रियों को मन से वश में कर लिया जाता है।


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