कमजोर मुहूर्त में भी कार्य का आरंभ किया जा सकता है

  • कमजोर मुहूर्त में भी कार्य का आरंभ किया जा सकता है
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Thursday, February 13, 2014-7:27 AM

मुहूर्त कितना ही शुद्ध क्यों न हो, लेकिन अपना मन मुहूर्त के लिए उत्साहित नहीं हो तो मुहूर्त नहीं करना चाहिए।

आर्ङगरा मन उत्साहं विप्र वाक्यो जनार्दन:।


सूर्य का प्रतिनिधित्व आत्मा करती है तो चंद्रमा का प्रतिनिधि मन है। यदि मन स्वीकृति प्रदान नहीं करता है, तो कितना ही शुभ मुहूर्त क्यों न हो शुभ फल प्राप्त नहीं होता है। शास्त्रों में मन को बंधन और मुक्ति का कारण बताया है।

‘मन एक मनुष्यणां कारणं बंध मोक्षसो:’


मन को भावी घटना चक्र का पूर्वाभास भी होता है। अत: मन की स्वीकृति मिलने पर ही कार्य का शुभारंभ करना चाहिए। मुहूर्त प्रकरण में भी मन कारक ग्रह चंद्रमा का बहुत महत्व है। चंद्र बत्त के बिना मुहूर्त शुद्ध हो ही नहीं सकता है। चौथे, आठवें, बारहवें चंद्रमा की स्थितियों में मुहूर्त वर्जनीय होता है।
 
इसलिए जब तक मन साक्ष्य नहीं देता है मुहूर्त नहीं करना चाहिए। मन की संतुष्टि मिलने पर कमजोर मुहूर्त में भी कार्य का आरंभ किया जा सकता है।


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