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शनिदेव को मनाएं, दुष्परिणामों से छुटकारा पाएं

  • शनिदेव को मनाएं, दुष्परिणामों से छुटकारा पाएं
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Saturday, February 15, 2014-10:21 AM

जब तक शनि देव की कृपा प्राप्त नहीं होती, संसार में उन्नति के पथ पर बढ़ना सम्भव नहीं है। अगर आपके कर्म निन्दनीय और क्रूर है भाग्य कितना ही जोड़दार क्यों न हो शनि की नीच दृष्टि पड़ते ही मनुष्य का विवेक समाप्त हो जाता है, उसके निर्णय लेने की शक्ति कम हो जाती है, जितना भी प्रयास करे उसके समस्त कार्यों में असफ़लता ही हाथ लगती है। स्वभाव मे चिड़चिड़ापन आ जाता है, नौकरी करने वालों के अधिकारियों और साथियों से झगड़े होते हैं, व्यापारियों को लम्बी आर्थिक हानि होने लगती है, विद्यार्थियों का पढ़ने में मन नहीं लगता।

ऐसे हालत पैदा हो जाते हैं कि जातक चाह कर पर भी कोई शुभ कार्य नहीं कर पाता। दिमागी उन्माद के कारण उन कार्यों को कर बैठता है जिनको करने के उपरांत केवल पछतावा ही हाथ लगता है। निम्न उपायों को भक्ति एवं श्रद्धापूर्वक शनिवार के दिन करने से शनिदेव का कोप शांत होता है और शनि की दशा के समय उनके भक्तों को कष्ट की अनुभूति नहीं होती।

1 लोहे के पात्र में सरसों का तेल डालें और उसमें लोहे की कुछ कील डालकर दान करें।

2  पीपल की जड़ में तेल अर्पित करें।

3 तेल से तला हुआ पराठां बनाने के उपरांत उस पर कुछ भी मिष्ठान रखें और गाय के बछड़े को खिला दें।

4 शनिवार अथवा शनिश्चरी अमावस्या को सूर्यास्त के समय जो घर में भोजन बने उसे पत्तल में डाल कर ऊपर से काले तिल अथवा नैवेद्य डाल कर पीपल की पूजा करें। पूजा की समाप्ति पर भोजन काली गाय या काले कुत्ते को खिला दें।

5 कांसें की कटोरी में थोड़ा सा तेल डालें उसमें अपना चेहरा देखें और यह तेल किसी को दान स्वरूप दे दें।

6 शनिवार को काले रंग के वस्त्र धारण करें।

7 शनिवार के दिन 108 तुलसी के पत्तों पर जय श्री राम लिखकर,पत्तों को सूत्र में पिरो कर माला बना कर श्री हरि विष्णु के गले में डालें।

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