रत्न करते हैं रोगों को छू मंतर

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Sunday, February 23, 2014-6:39 AM

ज्योतिष शास्त्र एक बहुत ही वृहद् ज्ञान है। जिन लोगों की समस्याओं का समाधान ज्योतिष से तुरंत हो जाता है वह इसे चमत्कार मानते हैं मगर असल में ये केवल ग्रह-गणित है जो प्रश्न-कुण्डली के माध्यम से प्रश्न-कुण्डली में स्थित ग्रहों के द्वारा पता लगाया जा सकता है कि आप की समस्या क्या है और उसका निदान क्या है?

ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार मानव शरीर में रोगों का समावेश होना अशुभ ग्रहों के प्रभाव से एवं पूर्वजन्म के अवांछित संचित कर्मो के प्रभाव से होता है। अशुभ ग्रहों की दृष्टि को शुभता में बदलने के लिए पूजा, पाठ, मंत्र जाप, यंत्र धारण, विभिन्न प्रकार के दान एवं रत्न धारण आदि साधनों का प्रयोग किया जाता है।

ज्योतिष में बारह राशियां हैं और नवग्रह अपनी अपनी प्रकृति एवं गुणों के आधार पर किसी भी जातक के अंगों और बीमारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ग्रहों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए रोगों का निवारण करना संभव है एवं रत्नों को धारण करने से शीध्रता से इनका निदान किया जा सकता है।

उच्च रक्तचाप - उच्च रक्तचाप होने पर बी.पी. स्टोन बाएं हाथ की मध्य अंगुली में धारण करें।

ह्वदय रोग -
ह्वदय रोग बहुत से ग्रहों के कुपित होने से होते हैं जैसे सूर्य के कुपित होने से माणिक, चन्द्र के कुपित होने से मोती और अन्य ग्रहों के कुपित होने पर उनसे संबंधित रत्न धारण करें।

मधुमेह - मधुमेह के रोगी सफेद मूंगे, एक्यूमेरिन रत्न धारण करें।

बवासीर -
बवासीर के रोगी काला अकीक रत्न दाएं हाथ की मध्य उंगली में धारण करें।

श्वांस रोग -
श्वांस रोग के रोगी पन्ना रत्न, सफेद मूंगा अथवा गोमेद रत्न धारण करें।

स्त्री रोग - स्त्री रोगों में गोमेद धारण करें।

जो जातक रत्न धारण नहीं करना चाहते वह कांच की शुद्ध बोतल में रत्न डाल कर उस बोतल में पानी भर लें और उस पानी का सेवन करें। किसा भी रत्न का चुनाव करने से पूर्व किसी वशिष्ठ ज्योतिषी से परामर्श अवश्य कर लें।


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