ऐसे स्थान पर मां धन लक्ष्मी निवास नहीं करती....

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Friday, February 21, 2014-7:05 AM

मनुष्य स्वयं अपने भाग्य का र्निमाता है। उसी के अनुसार मानव सुख-दुःख, अमीरी-गरीबी के भोग भोगता है। जब हम पैदा होते हैं तो हम बिल्कुल एक शुद्ध पवित्र निर्मल आत्मा होते हैं फिर हम होश या बेहोशी में जो भी भावनात्मक या मानसिक क्रियाएं-प्रतिक्रियाएं करते हैं उसकी सकारात्मक या नकारात्मक तरंगें हमारी आत्मा के चारों ओर संस्कार निर्मित करती हैं। उसी के अनुरूप हमारा स्वभाव,आदतें,आकर्षण-विकर्षण बनता एवं बिगड़ता है।

आज आप वो ही हैं जो आपने कल बीज डाले थे, कल आप वो ही होंगे जो आज, अभी, इस पल आप निरंतर बीज डालेंगे। अगर आप जाग गए प्रकृति के नियमों को पहचान गए तो अब आप अपनी इच्छा शक्ति के अनुसार जैसा भविष्य चाहते हैं वैसा निर्मित कर सकते हैं क्योंकि अब हर पल का बीज आपके हाथ में है। आप होश में यह बीज डाल रहे हैं इसलिए आप अपने विधाता हैं आप उसके लिए जिम्मेदार हैं।

अब तक आपने जो कमाया वह भाग्य, आगे आप चाहें तो इच्छा शक्ति का उपयोग कर अपनी मर्जी अनुसार अपना भाग्य बदल सकते हैं। उसके लिए माता धन लक्ष्मी को अपने घर में विराजित करना होगा। कुछ ऐसे स्थान हैं जहां मां धन लक्ष्मी निवास नहीं करती....


1 जिस घर में प्रेम एवं सद्भावना के स्थान पर ईर्ष्या-द्वेष, क्रोध और कलह का समावेश हो जाता है वहां अधार्मिक, दुर्गुण और बुरे व्यसन आ कर निवास करने लगते हैं।

2 जिस स्थान पर कोई वृद्ध सत्पुरुष ज्ञान, विवेक और धर्म की बात करें। उन सद्वचनों को समझने एवं आदर देने की बजाय कोई उनका उपहास एवं निंदा करें।

3 जिस घर में अधार्मिक कुकृत्य पाप, अधर्म और स्वार्थ रहता है।

4 जो मनुष्य गुरु, माता-पिता और बड़ों को आदर नहीं देते।

5 जो बच्चे अपने पालनहार अर्थात मां बाप से मुंहजोरी एवं वाद-विवाद करते हैं।  

6 जो स्त्रियां अपने सास ससुर और पति का आदर नहीं करती।

7 जो स्त्रियां सुदंर पुरूषों की ओर आकर्षित होकर उनके साथ भोग भोगें।


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