इन मंत्रों का जाप जीवन में दिलाएगा मान और सम्मान

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Friday, February 21, 2014-7:32 AM

भारतीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ईश्वरीय शक्तियों की उपासना अलग-अलग रूपों में की जाती है। हिन्दू धर्म में तैंतीस करोड़ देवताओं को उपास्य देव माना गया है व विभिन्न शक्तियों के रूप में उनकी पूजा की जाती है।  आजकल परेशानियों, कठिनाइयों के चलते हम ग्रह शांति के उपायों के रूप में कई देवी-देवताओं की आराधना, मंत्र जाप एक साथ करते हैं। जो कि सकारात्मक प्रभाव देने की बजाय नकरात्मकता का संचार करते हैं।

शुक्र के अशुभ गोचर की अवधि या फिर शुक्र की दशा में निम्न मंत्रों का पाठ प्रतिदिन या फिर शुक्रवार के दिन करने पर समय के अशुभ फलों में कमी होने की संभावना बनती है। मुंह के अशुद्ध होने पर मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए। ऐसा करने पर विपरीत फल प्राप्त हो सकते हैं। कला, शिल्प, सुंदरता, बौधिक-समृद्धि, प्रभाव, ज्ञान, राजनीति और समाज में मान- प्रतिष्ठा शुक्र-देवता की कृपा से प्राप्त होती है l

*  शुक्र  देव  के  सामान्य  मन्त्र  :  

   " ॐ  शुं  शुक्राय  नमः "

*  शुक्र  देव  के  बीज  मन्त्र   :  
              
 "   ॐ    द्राम    द्रीम    द्रौम   सः  शुक्राय    नमः  "

*  शुक्र  देव  के  गायत्री  मन्त्र   :

 "   ॐ    शुक्राय     विद्महे   , शुक्लाम्बर - धरः   , धीमहि   तन्न:   शुक्र   प्रचोदयात  "

*  शुक्र  देव  के  वैदिक  मन्त्र  :  

  "  ॐ   अन्नात्परिश्रुतो   रसं  ब्रह्म्न्नाव्य पिबत् - क्षत्रम्पयः  सोमम्प्रजापति   !
         ऋतेन     सत्यमिन्द्रिय्वीपानं-गुं -शुक्र्मन्धस्य  - इन्द्रस्य  - इन्द्रियम  - इदं  पयो - अमृतं   मधु  !!"  

* शुक्र  देव  के  पौराणिक  मन्त्र   :

   " ॐ    हिमकुंद - मृनालाभं   दैत्यानां   परमं   गुरुं   !
    सर्वशास्त्र   प्रवक्तारं    भार्गवं    प्रन्माम्य्हम    !!"

*   शुक्र  देव  के  ध्यान  मन्त्र   :  

    "  दैत्यानां  गुरु :  तद्वत   श्वेत  - वर्णः   चतुर्भुजः   !      
     दंडी  च   वरदः   कार्यः   साक्ष - सूत्र  - कमंड - लु:  !!"


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