श्री रणकेश्वर मंदिर के कुएं में 360 तीर्थों का जल मिश्रित है

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Thursday, February 27, 2014-7:46 AM

श्री रणकेश्वर महादेव शिव मंदिर धूरी-बरनाला रोड पर धूरी से 10 किलोमीटर दूर गांव रणीके में स्थित है। यहां लगभग पांच हजार वर्ष प्राचीन भगवान शिव का स्वयंभू शिव ज्योतिलिंग है जिसका प्रमाण महाभारत के अध्याय 142 आदि पर्व पृष्ठ 434 पर अंकित है।

द्वापर युग में इसी पावन स्थल पर अर्जुन ने भगवान शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अर्जुन को गांडीव धनुष प्रदान किया। स्वयंवर में द्रौपदी वरण के पश्चात पांडवों ने इस स्थान पर शिव का विधिवत पूजन कर हस्तिनापुर के लिए प्रस्थान किया था।

जब कौरवों ने पांडवों को वनवास पूरा करने के बाद भी राज-पाट से बेदखल कर दिया तो पांडवों ने श्रीकृष्ण के साथ मिलकर इसी स्थान से भगवान शिव का पूजन कर रण का बिगुल बजाया तथा युद्ध में विजय प्राप्त की।

इसी कारण इस गांव का नाम रणीके पड़ा तथा भगवान शिव ‘रणकेश्वर’ के नाम से विख्यात हुए। इस मंदिर के कुएं में 360 तीर्थों का जल मिश्रित है। हर वर्ष श्री रणकेश्वर महादेव का विशेष उत्सव महाशिवरात्रि का त्यौहार यहां श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। पंजाब व अन्य राज्यों से हजारों की संख्या में शिव भक्त यहां पहुंच कर भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं। यहां हर वर्ष शिवरात्रि के दिन कांवडि़ए अलग-अलग स्थानों से जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

                                                                                                                                                                             —संजीव गर्ग


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