श्वेत शनिदेव भक्तों को काली छाया से दूर रखते हैं

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Saturday, March 01, 2014-7:30 AM

भारत के उत्तर पश्चिम में बसा राजस्थान दुनिया की बेहतरीन जगहों में से एक है। यहां आने वाले पर्यटक सुन्दर महल, ऊंट की राजसी सवारी, वीर किवदंतियां, रोमांटिक कहानियों, जीवंत संस्कृति और आकर्षक विरासत से रूबरू होते हैं। राजाओं की भूमि राजस्थान में बसे झीलों के शहर कहलाने वाले उदयपुर में हाथीपोल स्थित शनि देव जी का अभिनव श्री रूप संसार भर में प्रसिद्ध है क्योंकि यहां शनिदेव जी अपने पिता साक्षात भगवान सूर्य देव को निगलने की मुद्रा में भक्तों को दर्शन देते हैं।

 यहां प्रतिदिन संसार के प्रत्येक कोने से असंख्य शनि भक्त शनि देव जी के दर्शन व उनकी आराधना करने आते हैं। शनि देव जी का यह मंदिर लगभग 90 साल पुराना है। इस मंदिर का गठन तत्कालीन महाराणा फतेह सिंह द्वारा जमीन देने पर हुआ।

मान्यता है शनि की दृष्टी जिस जातक पर पड़ जाती है उसके बनते काम बिगड़ जाते हैं इसलिए शनि की दृष्टी से सभी भयभीत रहते हैं। इस मंदिर को बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया है की शनि दर्शनों के लिए आने वाले किसी भी श्रद्धालु पर  शनि की सीधी दृष्टी न पड़ने पाए। शनि देव जी के श्री रूप में उनकी दोनों आंखे साइड पर हैं। हाथी की सवारी करते हुए शनि देव जी ने नरसिंह रूप धारण किया हुआ है। शनि देव जी के इस श्री रूप की विशेषता है कि वह भगवान सूर्य को निगल रहे हैं।

जब शनि देव जी की साढ़सती अपने पिता भगवान सूर्य नारायण पर हुई तो उन्होंने सूर्य जी को निगलना चाहा मगर अन्य देवताओं के प्रार्थना करने पर उन्होंने भगवान सूर्य नारायण को छोड़ दिया। शनि की दृष्टी सदैव कुपित नहीं होती मगर इस मंदिर में शनि देव जी की प्रतिमा के श्री मुख को आसमान की और देखते हुए बनाया गया है। जिससे शनि देव जी की सीधी दृष्टि अपने भक्तों पर नहीं पड़ती।

उदयपुर में स्थापित यह शनि मन्दिर संसार के अन्य शनि मंदिरों से अलग है क्योंकि अन्य धार्मिक स्थलों में शनि जी का श्री रूप श्याम वर्ण का होता है लेकिन इस श्री रूप को चांदी का श्रृंगार किया जाता है। जिससे यह श्वेत शनिदेव कहलाते हैं और यहां पर तेल सीधे अर्पित नहीं किया जाता बल्कि शनि जी का एक अष्ट धातु का श्री रूप मंदिर में स्थापित है। जिस पर भक्त तेल अर्पित करते हैं।

मंदिर में पूजा करने का अधिकार ब्राह्मण समाज के भ्रगुवंशी कुल के पुजारी को दिया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है की शनि देव जी के समक्ष भक्त अपने किसी भी तरह के कष्ट बांटते है तो शनि देव जी उनके समस्त कष्टों का निवारण कर उनके जीवन पर मंडरा रही काली छाया को दूर भगाते हैं।






 


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