हिन्दू मुसलमानों में बड़ा कौन है?

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Friday, March 07, 2014-7:31 AM

गुरु ग्रंथ साहिब

ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै।
गरीब निवाजु गुसाईआ मेरा माथै  छत्रु धरै॥
जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै।
नीचउ ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै॥    
नामदेव कबीरू तिलोचनु सधना सैनु तरै।
कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरिजीउ ते सभै सरै ॥

 
हे प्रभु ! आपके बिना कौन ऐसा कृपालु है जो भक्त के लिए इतना बड़ा कार्य कर सकता है । आप गरीब और दीन-दुखियों पर दया करने वाले हैं। आप ही ऐसे कृपालु स्वामी हैं जिन्होंने मेरे माथे पर राजाओं जैसा छत्र रख दिया। आपने मुझे राजाओं जैसा सम्मान प्रदान कर दिया। मैं अभागा हूं। मुझ पर आपकी असीम कृपा है। आप मुझ पर द्रवित हो गए। हे स्वामी, आपने मुझ जैसे प्राणी को इतना उच्च सम्मान दिया। आपकी दया से नामदेव, कबीर , त्रिलोचन, सधना और सैन संसार से तर गए। उन्हें ज्ञान प्राप्त हो गया।

श्री गुरु रवि दास जी कहते हैं ‘हे संतो सुनो! हरि जी सब कुछ करने में समर्थ हैं  वह कुछ भी कर सकते हैं।’

पुछन गल ईमान दी काज़ी मुलां इकठे होई॥
वडा सांग वरताइआ लख न सके कुदरति कोई॥
पुछण खोल किताब नूं वडा हिंदू की मुसलमानोई॥
बाबा आखे हाजीआं शुभ अमलां बाझो दोवें रोई॥
हिंदू मुसलमान दोइ दरगहि अंदर लैण न ढोई॥
कचा रंग कुसुंभ का पाणी धोतै थिर न रहोई॥
करन बखीली आप विच राम रहीम कुथाइ खलोई॥
राह शैतानी दुनीआ गोई ॥33॥


एक बार गुरु नानक देव जी से मक्का में पूछा गया कि हिन्दू मुसलमानों में बड़ा कौन है तो गुरु जी ने जवाब दिया : न कोई बड़ा है न कोई छोटा। ईश्वर की नजर में सब बराबर हैं। यही कारण है कि वह अपनी कृपा बरसाने के लिए किसी को भी चुन लेता है। इसलिए हमें सबका सम्मान करना चाहिए।  
    
                                                                                -ज्ञानी गुरमीत सिंह, प्रमुख ग्रंथी, गुरुद्वारा चांदी की टकसाल, जयपुर


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