शारीरिक अंगों से मिलते हैं भावी जीवन के संकेत

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Saturday, March 08, 2014-7:28 AM

महिलाओं और पुरूषों के शारीरिक अंगों से भी शुभ अशुभ की सूचना मिलती है। प्रत्येक अंग का अलग-अलग महत्त्व होता है। जन्म कुंडली में महिलाओं और पुरूषों के दाएं एवं बाएं अंग के विभिन्न प्रभाव होते हैं। शरीर के अंगों से भावी जीवन में होने वाली घटनाओं के संकेत मिलते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार महिलाओं और पुरूषों में शारीरिक चिह्न अपने अलग अलग शुभ अथवा अशुभ प्रभाव देते हैं। पुरूष की जन्म कुंडली में शंख एवं चक्र चिह्न शरीर के दाएं भाग में शुभ प्रभाव देते हैं और महिलाओं की कुंडली में यह चिह्न बाएं भाग में शुभ प्रभाव देते हैं। महिलाओं के ललाट, आंख, गाल, कंधे, हाथ, वक्ष, उदर एवं पांव के बाएं भागों में तिलों का होना शुभ माना जाता है और पुरूषों के दाएं भाग में। अंगों  की फड़कन महिलाओं के बाएं अंगों में शुभ मानी गई है और पुरूषों के दाएं भाग में।

हस्तरेखा शास्त्री मानते हैं कि पुरूषों का बायां हाथ उन्हें अपने पूर्व जन्मों के पाप पुण्य के अनुसार मिलता है, जबकि दायां हाथ वर्तमान जीवन के भाग्य और कर्मों का संपूर्ण विवरण रखता है। इसके विपरित महिलाओं के बाएं हाथ को महत्वपूर्ण माना गया है। आधुनिक युग में समय के साथ परिस्थितियों में भी परिर्वतन आया है उसके परिणामस्वरूप आज के समय में कुछ ज्योतिषी नौकरी पेशा अथवा स्वयं निर्णय लेने में सक्षम महिलाओं के दाएं हाथ का निरीक्षण भी करने लगे हैं।

कुछ विशेष योगायोगों के संदर्भ में महिला और पुरूष जातकों को कमोबेश एक ही तरह से फलादेश दिए जाते हैं। जिस महिला की जन्म कुण्डली में पुरूष राशियों और पुरूष ग्रहों का वर्चस्व होता है, उनके जीवन में कमोबेश पुरूषों के समान होते हैं जैसे भारी आवाज और बड़े डील-डौल। विशेष जोश और उत्साह के साथ जीवन पथ पर आगे बढ़ने वाली महिलाओं को देखकर ही भांपा जा सकता है कि उनकी जन्म कुंडली में पुरूष राशियों और सूर्य, मंगल और गुरू जैसे ग्रहों का अत्यधिक प्रभाव है।
 


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