शनि देव की कृपा से बनें मुकद्दर के सिकन्दर

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Saturday, March 15, 2014-9:03 AM

शनि देव का व्रत करने से जातक पर शनि देव की कृपा होती है और वह पाप के मार्ग पर जाने से बच जाता है। जिससे शनि से संबंधित कोई भी अशुभ प्रभाव उन्हें नहीं भोगना पड़ता। किसी भी शनिवार से व्रत का श्री गणेश किया जा सकता है। व्रतधारी को शनिवार के दिन मुंह अंधेरे उठकर नित्य कार्यों से निर्वत होकर सुरमा, काले तिल, सौंफ, नागरमोथा और लोध मिले हुए जल से स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण कर मंदिर में जाकर शनिदेव के श्री रूप का पूजन करना चाहिए।


शनि देव को नीले लाजवन्ती के फूल, तिल, तेल, गुड़ बहुत प्रिय हैं। शनि देव के नाम से दीपोत्सर्ग करना चाहिए। शनि देव की पूजा के उपरांत राहु और केतु की पूजा करें। संध्या समय पीपल देवता को जल दें, सूत्र बांधें एवं सात बार परिक्रमा करें और शनि देव के किसी भी मंत्र का जाप करते रहें। शनि मंदिर में तेल का दीप दान करें, जिसमें कुछ दानें उड़द की दाल के डाल दें। उड़द दाल की खिचड़ी बनाकर शनि देव को भोग लगा कर गरीबों में बांट दें और शेष प्रशाद स्वंय ग्रहण करें।

शनिवार को काले रंग के वस्त्र धारण करें। तुलसी के 108 पत्ते लेकर उन पर श्री राम लिखें और पत्तों को एक सूत्र में पिरो कर माला बना कर श्री हरि विष्णु के गले में डालें। अगर आप शनिवार का व्रत नहीं कर रहे तो भी शनिवार के दिन शनि देव का पूजन और तैलाभिषेक कर शनि की साढेसाती, ढैय्या और महादशा जनित संकट और आपदाओं से मुक्ति पा सकते हैं। शनि देव की कृपा से मनुष्य को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

महामुनि पिप्पलाद जी के अनुसार शनि देव की कृपा प्राप्ति के लिए शनिवार के दिन शनिदेव की लोहे की मूर्ति को तेल से भरे बर्तन में रखकर एक वर्ष तक काले फूल, काले कपड़े, तिल, कसार, भात से व्रत पूजन करना चाहिए। काली गाय, काला कम्बल, तिल का तेल और दक्षिणा दान ब्राह्मणों को करना चाहिए।


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