खजाना हाथ से निकल जाए तो भी चाबी संभाले रखना

  • खजाना हाथ से निकल जाए तो भी चाबी संभाले रखना
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Tuesday, March 18, 2014-8:48 AM

मानव जीवन में जब विकट स्थिति आ जाए तो हर सगा-संबंधी साथ छोड़ेगा, परमात्मा भी दूर है-वह दिखाई नहीं देगा मगर प्रतिनिधि गुरु कभी अपने शिष्य का साथ नहीं छोड़ेगा इसलिए गुरु के प्रति अतिशय प्रेम बनाए रखिए। दुनिया के सारे रिश्ते एक सद्गुरु में देखना।

सारे संसार के प्रेम को एक सद्गुरु में देखना क्योंकि गुरु आत्मस्वरूप है, सब धर्मों का है। उसे अपने सामने महसूस करो जो हमारे हर संकट में साथ है, जो हमें आशीर्वाद देता है और जो गुरुओं का भी परम गुरु है, जो पिताओं का भी परमपिता है, जो माताओं की भी परममाता है, सांसारिक माता-पिता को तो एक न एक दिन इन्सान को छोड़कर सब बंधन तोड़कर चले जाना है लेकिन जो हर देश में, हर वेश में, हर काल में, हर हाल में साथ देता है, उसके साथ हमारा नाता जोडऩे वाला परम का स्वरूप सद्गुरु होता है।

 विश्वविद्यालय गुरुभक्त रबिया बसरी ने भी गुरु महत्व के विषय में यही गाया-

'हरि रूठे ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर'


अर्थात किसी व्यक्ति से यदि हरि रूठ जाएं तो पूरा संसार उसके विपरीत गति करने लगता है, उससे उसकी किस्मत रूठ जाती है। यदि किसी का गुरु ही उससे रूठ जाए तब मनुष्य के पास कोई सहारा नहीं बचता, वह व्यक्ति बिना पतवार के दिशाहीन नाव की तरह हो जाता है जिसका कोई भविष्य नहीं होता इसलिए खजाना हाथ से निकल भी जाए तो भी चाबी संभाले रखना, यही चाबी फिर से दरवाजा खोलेगी। कभी गुरु से दूर नहीं होना, गुरु ठुकरा भी दे, नाराज भी हो जाए तो भी उसके प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखना। 


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