जानें कब और कैसे बनेंगे आपकी कुंडली में धन और यश के योग

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Tuesday, March 18, 2014-8:50 AM

कुंडली में शुभ और अशुभ दोनों योग होते हैं जिनमें कुछ ग्रह योग अशुभ माने जाते हैं जो व्यक्ति के जीवन का सुख-चैन छीन लेते हैं, तो कुछ ऐसे शुभ ग्रह हैं जो व्यक्ति का जीवन संवार देते हैं। आपकी कुंडली में कौन-सा योग है उसे जानने के लिए आप ज्योतिषशास्त्र में बताए गए योग को समझ कर अपनी कुंडली जान सकते हैं। यहां कुछ उत्तम योग जैसे महालक्ष्मी योग, नृप योग आदि के बारे में बताया जा रहा है-

ज्योतिष विद्याएं ग्रह और उनके योगों के आधार पर फल का ज्ञान देती हैं। कुछ ग्रहयोग अशुभ तो कुछ शुभ माने जाते हैं। अशुभ योग किसी भी व्यक्ति का जीवन बर्बाद कर देता है जबकि कुछ शुभ योग व्यक्ति के जीवन को सुख-चैन से भर देते हैं। महान योगों में महालक्ष्मी योग धन और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला योग है। यह योग कुंडली में तब बनता है जब धन भाव यानी द्वितीय स्थान का स्वामी बृहस्पति एकादश भाव में बैठ कर द्वितीय भाव पर दृष्टि डालता है। यह धनकारक योग माना जाता है।

इस प्रकार एक महान योग है सरस्वती योग। यह योग आपकी कुंडली में तभी बनता है जब शुक्र, बृहस्पति और बुध ग्रह एक-दूसरे के साथ हों अथवा केंद्र में बैठकर एक-दूसरे से संबंध बना रहे हों। युति अथवा दृष्टि किसी प्रकार से संबंध बनने पर यह योग बनता है। यह योग जिस व्यक्ति की कुंडली में बनता है उस पर विद्या की देवी मां सरस्वती की कृपा खूब बरसती है।

सरस्वती योग वाले व्यक्ति कला, संगीत, लेखन एवं विद्या से संबंधित किसी भी क्षेत्र में काफी नाम और धन कमाते हैं। नृप योग अपने नाम के अनुरूप ही अज्ञात होता है। यह योग जिस भी व्यक्ति की कुंडली में  बनता है वह राजा के समान जीवन जीता है। इस योग का निर्माण तब होता है जब व्यक्ति की जन्म कुंडली में तीन या उससे अधिक ग्रह उच्च स्थिति में रहते हैं। अमला योग भी शुभ और महान योगों में माना जाता है। यह योग तब बनता है जब जन्म पत्रिका में चंद्रमा से दशम स्थान पर कोई शुभ ग्रह स्थित होता है। इस योग वाला व्यक्ति अपने धन, यश और र्कीत हासिल करता है।

गजकेसरी योग को असाधारण योग की श्रेणी में रखा गया है। यह योग जिस व्यक्ति की कुंडली में उपस्थित होता है उसे जीवन में कभी भी अभाव नहीं खटकता। इस योग के साथ जन्म लेने वाले व्यक्ति की ओर धन, यश और र्कीत स्वत: खिंची चली आती है। जब कुंडली में गुरु और चंद्र पूर्ण कारक प्रभाव के साथ होते हैं तब यह योग बनता है।

लग्र स्थान में कर्क, धनु, मीन, मेष या वृश्चिक हो तब यह कारक प्रभाव के साथ माना जाता है। हालांकि अकारक होने पर भी फलदायी माना जाता है परन्तु यह मध्यम दर्जे का होता है  चंद्रमा से केंद्र स्थान में 1, 4, 7, 10 बृहस्पति होने से गजकेसरी  योग बनता है। इसके अलावा अगर चंद्रमा के साथ बृहस्पति हो तब भी यह योग बनता है। पारिजात योग भी उत्तम योग माना जाता है। इस योग की विशेषता यह है कि यह जिस व्यक्ति की कुंडली में होता है वह जीवन में कामयाबी और सफलता के शिखर पर पहुंचता है परन्तु रफ्तार धीमी रहती है यही कारण है कि मध्य आयु के पश्चात इसका प्रभाव दिखाई देता है।

 पारिजात योग का निर्माण तब होता है जब जन्म पत्रिका में लग्रेश जिस राशि में होता है उस राशि का स्वामी कुंडली में उच्च स्थान पर हो या अपने घर में हो। छत्र योग जिस व्यक्ति की जन्म पत्रिका में होता है वह व्यक्ति जीवन में निरंतर प्रगति करता हुआ उच्च पद को प्राप्त करता है। इस योग को भगवान की छत्रछाया वाला योग कहा जा सकता है। यह योग तब बनता है जब कुंडली में चतुर्थ भाव से दशम भाव तक सभी ग्रह मौजूद हों या फिर दशम भाव से चतुर्थ भाव तक सभी ग्रह उच्च स्थिति में हों। तीन भावों में दो-दो ग्रह हों या तीन भावों में एक-एक ग्रह स्थित हों तब शुभ योग बनता है। यह योग नंदा योग के नाम से जाना जाता है। इस योग वाला जातक स्वस्थ एवं दीर्घायु होता है। इस योग से प्रभावित व्यक्ति का जीवन सुखमय रहता है।
 
इसी प्रकार के कई अन्य योग हैं जिनकी मौजूदगी से व्यक्ति का जीवन सुखमय व आनंदित रहता है और व्यक्ति यश-कीर्ति पाता है।


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