गणेश जी करेंगे सोए हुए भाग्य को जागृत

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Wednesday, March 19, 2014-8:56 AM

अपने घर का सपना प्रत्येक व्यक्ति संजोता है। जहां वो अपना घर बनाता है उस  स्थान के वातावरण,पर्यावरण का बढ़ा स्थायी एवं अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों पर प्रभाव पडता है। जीवन को आनन्दमय, सुखी व समृद्ध बनाने का वैसे तो कोई निश्चित फार्मूला नहीं है लेकिन कभी-कभी बहुत अधिक प्रयास करने पर भी सफलता प्राप्त नहीं होती। मनुष्य वास्तु के कुछ नियमों को अपनाकर कामयाबी के शिखर को छू सकता है। वास्तु शास्त्र का उद्देश मनुष्य को कल्याण मार्ग में लगाना है । हमारी एक छोटी सी कोशिश, एक छोटा सा बदलाव हमारे संपूर्ण जीवन का रूप पलटकर रख सकता है ।

1 घर के मुख्य द्वार पर घर की गृहलक्ष्मी मांगलिक चिन्ह बनाएं। गणेश जी, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर जी का श्री रूप स्थापित करें। ऐसे घर में ऊपरी बाधाएं अपना प्रभाव नहीं डालती और सदा के लिए संकटों से मुक्ति मिलती है।

2 जिस घर में भगवत आराधना होती है उस घर में सोए हुए भाग्य को जागृत किया जा सकता है।  

3 मुख्य द्वार के सामने वृक्ष, स्तम्भ, कुआं तथा जल भण्डारण होने से नकारात्मकता फैलती है।

4 मुख्य द्वार के सामने कूड़ा एवं गंदगी न होने दें। इससे घर में दरिद्रता का प्रवेश होता है।

5 घर के मध्य में बरामदा बनाएं उसमें तुलसी का चबूतरा बना कर घर की गृहलक्ष्मी सुबह शाम पूजा आराधना करे। ऐसे करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

6 मुख्य द्वार उत्तर पूर्व में होने से शुभता का संचार होता है। मुख्य द्वार के सामने सीढियां व रसोई न बनवांए।

7 दक्षिण दिशा में रोशनदान अथवा खिड़कियां नहीं होनी चाहिए।

8 घर में बन्द घड़ी, टूटे हुए कांच और पुरानी रद्दी का सामान जमा करके न रखें एवं घर में समान को अस्त व्यस्त न रखें। इससे नकारात्मक शक्तियां अपना निवास वहीं पर स्थापित कर लेती हैं। बेहतर होगा अनुपयोगी वस्तुओं को घर से निकालते रहें ।

9 शयन कक्ष में बैड के सामने दर्पण अथवा ड्रेसिंग टेबल न रखें अगर मजबूरी वश रखना ही पड़े तो उसे सदैव ढक कर रखें। केवल इस्तेमाल करते समय ही इसका कपड़ा उठाएं।

10 घर में जितनी भी खिड़कियां हो उनकी संख्या सम रखें और सिढ़ियों की विषम।








 


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