दुर्गा देवी की नाभी के दर्शन होते हैं इस स्थान पर

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Wednesday, March 19, 2014-8:55 AM

उत्तराखण्ड में प्रसिद्व शक्तिपीठ श्री पूर्णागिरि मंदिर के द्वार आज विधिविधान के साथ श्रद्वालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। भारत नेपाल की अंर्तराष्ट्रीय सीमा पर स्थित चपावत जिले में प्रसिद्व शक्तिपीठ श्री पूर्णागिरि मंदिर के पट पुजारी भुवन चंद पान्डे द्वारा अपरान्ह ढाई बजे की गई पूजा अर्चना के बाद चपावत के जिलाधिकारी दीपेन्द्र चौधरी की मौजूदगी में खोले गए।

विपरीत पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मंदिर को प्रति वर्ष दो माह के लिए केवल इन्हीं दिनों खोला जाता है। सरकारी आकड़ों के अनुसार गत वर्ष यहां आए तीस हजार से अधिक यात्रियों की संख्या इस वर्ष और अधिक बढ़ने की संभावना है। इस के कारण इस वर्ष मेला अवधि को बढ़ा कर तीन माह कर दिया गया है।

समुद्र तल से तीन हजार मीटर की उंचाई पर स्थित शक्ति पीठ के मार्ग में होने वाले भूस्खलन की वजह से प्रति वर्ष केवल इन्हीं दिनों खोला जाता है। शक्तिपीठ में श्रद्वालुओं हेतु जिला पंचायत द्वारा आयोजित किए जाने वाले इस मेला अवधि के बाद भी श्रद्वालुओं का तांता लगा रहता है, खासकर नव वर्ष और शरदीय नवरात्रि के दिनों में तो यहां बिना किसी सुविधा के भी श्रद्वालु अपनी जान की बाजी लगा कर यहां दर्शनार्थ आते हैं। माना जाता है कि दुर्गा देवी की नाभी इसी स्थान पर है।


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