क्या फरिश्ते सचमुच स्वर्ग में बसते हैं या...

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Thursday, March 20, 2014-7:31 AM

हमारी जिन्दगी की गाड़ी सही तरीके से आगे बढ़ रही होती है तो मददगार लोगों की पहचान करना हमारे लिए मुश्किल होता है। हमारे रोजमर्रा के जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हम संकट में फंसे हैं और वहां से बाहर निकलने का रास्ता नजर नहीं आता। तभी अचानक कोई अजनबी पास आता है और हमारी मदद कर वहां से चला जाता है। यह अधिकांश लोगों के साथ होता है। आप इसे किस रूप में देखते हैं?

ईश्वर में यकीन रखने वाले यह मानते हैं कि भगवान ही किसी न किसी रूप में मदद के लिए आगे आता है। ईश्वर का वह रूप कुछ भी हो सकता है। यह मानकर चलिए कि आप कभी भी इस दुनिया में अकेले नहीं हैं। जब भी आपको मदद की जरूरत होती है, कई रूप में आपको मददगार मिलते हैं।

भगवान न करे, क्या आप ने कल्पना की है कि युवावस्था में अगर आप किसी जानलेवा गंभीर बीमारी के शिकार हो जाएं तो क्या होगा? ऐसा लगेगा जैसे सब कुछ खत्म हो गया। खासकर तब जब आपके पास इस तरह की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए पैसे नहीं होंगे। क्योंकि इस तरह की बीमारियों का इलाज खर्चीला होता है, दवाओं के खर्च के बोझ से आप व आपका परिवार टूट जाता है। ऐसी संकट की घड़ी में लोग बिखर जाते हैं। ऐसे लोगों को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।

ईश्वर हमेशा आपके साथ रहता है। There is life after cancer के लेखक कार्तिकेय मिश्रा, जो सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, 37 साल की उम्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के शिकार हो गए, पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। हां, कई बार विचलित जरूर हुए लेकिन दोस्तों, परिवार और रिश्तेदारों की मदद से उन्होंने इस गंभीर बीमारी पर विजय पाई।

इस दौरान उन लोगों ने भी उनकी मदद की जो सीधे उनसे नहीं जुड़े थे या बहुत लंबे समय से उनके सम्पर्क में नहीं थे। उनकी जिंदगी में ये सब लोग फरिश्ता बनकर आए, मदद की और फिर उनके जीवन से दूर चले गए। पर आज भी ये उनकी स्मृतियों में है।

 कार्तिकेय मिश्रा का कहना है,‘मैं इसे ईश्वर की कृपा मानता हूं जिसने विपरीत परिस्थतियों में मेरी मदद के लिए इंसान के रूप में दूतों को भेजा जिन्होंने मेरी मदद की।’

वे कहते हैं कि हमें बिना किसी नफा-नुक्सान का आकलन किए दूसरों की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए। इंसानियत के नाते हमारा धर्म है कि हम एक-दूसरे की मदद करें। खासकर जब कोई जानलेवा बीमारी का शिकार हो। अनजान लोगों से मिलने वाली मदद इंसानियत और ईश्वर में आपके भरोसे को बढ़ाती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि जिस तरह किसी और ने आपकी मदद की आप भी वैसे कर सकते हैं।

कई बार ईश्वर हमें यह मौका भी देता है कि हम उसके भलाई के कार्यों में हाथ बटाएं लेकिन हम उस मौके की पहचान नहीं कर पाते। जिन्दगी में मिलने वाले इस तरह के मौकों को हाथ से न जाने दें।


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