भारत में राम-राज्य जैसी उन्नति क्यों नहीं हो पाई

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Saturday, March 22, 2014-7:39 AM

आज भी भारत देश में धन की, विद्या की, प्रतिभा की कमी नहीं है। कमी है तो केवल उदारता की, देश भक्ति की। हर व्यक्ति अपने को अमीर बनाने में, अधिकाधिक मौज-मस्ती करने में और अहंकार की तृप्ति में लगा है। अपनी सारी उपलब्धियों का लाभ अपने आप तक ही सीमित रखना चाहता है।

यदि थोड़ी उदारता अंतःकरण में उतर गई होती और जो संपति, विद्या, बुद्धि स्वार्थपरता की तृप्ति में लगी हुई है वह यदि समाज निर्माण में लग गई होती, लोगों ने औसत भारतीय नागरिक की तरह गुजारे में संतोष किया होता और अपनी उपलब्धियों को लोकमंगल के लिए समर्पित किया होता।

तो जो कुछ वैभव हमारे पास है, उतने से ही हमारा देश प्राचीनकाल के राम-राज्य जैसी उन्नति से कहीं आगे निकल गया होता पर उस संकीर्ण स्वार्थपरता को क्या कहा जाए ? जो मनुष्य के गले में फांसी बनी बैठी है और अहंता एवं विलासिता की तृप्ति से एक कदम आगे नहीं बढ़ने देती।

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