नवरात्र कहानी: कब और कैसे हुई व्रत की शुरूआत

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Tuesday, April 01, 2014-8:12 AM

चैत्र नवरात्र : नवदुर्गा यानी नवरात्र की नौ देवियां हमारे संस्कार एवं आध्यात्मिक संस्कृति के साथ जुड़ी हुई हैं। ईश-साधना और आध्यात्म का अद्भुत संगम है जिसमें देवी दुर्गा की कृपा की बरसात होती है।

सृष्टि के निर्माण के समय से ही शक्ति की आराधना की जाती रही है। सबसे पहले भगवान विष्णु ने मधु नामक दैत्य के वध के लिए इस व्रत का पालन कर अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त की। भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर के नाश के लिए यही व्रत किया। जब देवगुरु बृहस्पति की भार्या का हरण चंद्रमा ने कर लिया तो इस समस्या के समाधान के लिए यही व्रत उन्होंने भी किया।

त्रेता युग में प्रभु श्रीराम की भार्या सीता के लिए देवर्षि नारद के कहने से भगवान श्रीराम ने इस व्रत को करके रावण पर विजय पाई। यही अनुष्ठान महर्षि भृगु, वशिष्ठ, कश्यप ने भी किया। सभी प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नवरात्र में शक्ति की अराधना श्रेष्ठ मार्ग है।

भगवान शिव ने जब अपनी आराध्य शक्ति को नमस्कार कर उनकी पूजा की तो उस समय मंगल कामना के लिए निम्नलिखित श्लोक से महागौरी की स्तुति की थी।

या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

अगर आप भी माता रानी की कृपा पाना चाहते हैं तो नवरात्रों के दिनों में रोजाना  इस श्लोक का पाठ करें।

दुर्गा मां के नौ दिनों को देश भर में अपने अपने अंदाज से मनाया जाता है। कहीं इस अवसर पर देवी के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए कई तरह के नृत्य पेश किए जाते हैं तो कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा दुर्गा पूजा होती है।  दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल में बहुत धूम धाम से मनाई जाती है। जब दुर्गा पूजा का आरंभ हुआ तो इसे पारिवारिक उत्सव के रूप में मनाया जाता था, फिर धीरे-धीरे यह एक सामाजिक उत्सव बन गया। कला का भी इससे जुड़ाव हुआ, जैसे कालांतर में प्रतिमाएं बनाना और साज-सज्जा जैसी कलाएं त्योहार से जुड़ती गईं।

भारत विभिन्न संस्कृतियों वाला देश है। जिसके पर्व मनाने का अंदाज बहुत निराला है। भारत के पश्चिमी राज्य जैसे गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में होता है पारम्परिक गरबा और डांडिया। बदलते परिवेश के साथ अब ये गरबा और डांडिया कुछ ही सूबों तक सीमित न रहकर पूरे देश के अलग- अलग राज्यों जैसे बिहार, बंगाल,  मध्यप्रदेश में भी इसकी धूम रहती है। जिसमें सभी धर्मों के लोग शरीक होते हैं और विभिन्न जाति के लोग ऐसे लगते है मानों वो एक ही परिवार के सदस्य हों।  विदेशों में बसते भारतीय भी मां के रूपों की पूजा करते हुए डांडिया और गरबा के रंग में रंग जाते हैं। ये नृत्य तो मानो हर एक में नया जोश और उत्साह भरता है।


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