भविष्य मंथन: मंगली दोष का प्रभाव कब तक

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Tuesday, April 01, 2014-8:10 AM

वर्तमान समय में एक बड़ी जमात ऐसे लड़के-लड़कियों की है, जिनकी शादी न हो पाने की वजह मात्र उनका ‘मंगली’ होना ही होता है। उम्र बढ़ती जा रही है लेकिन शादी नहीं हो रही। हर बार बात बनते-बनते बिगड़ जाती है। खुद को अल्ट्रामॉड कहने वाली पीढ़ी भी ‘मांगलिक दोष’ के इस फेर से खुद को अलग नहीं कर पा रही है।  भारतीय ज्योतिषशा के अनुसार अगर किसी जातक की कुंडली के बारह भागों में से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम एवं द्वादशवें भाग में मंगल स्थित हों तो लड़का या लड़की मंगली हो सकते हैं। दक्षिण भारत में द्वितीय भाव में स्थित मंगल वाली कुंडली को भी ‘मंगली’ कुंडली माना जाता है। इससे डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि मंगल के प्रभाव से अस्सी प्रतिशत शादियों में देर होती है, पंद्रह प्रतिशत मामले बनते-बनते बिगड़ते हैं और मात्र पांच प्रतिशत मामलों में ही मंगल वैधव्यता या विधुरता का प्रभाव डालता है।

मंगल के प्रभाव से ग्रस्त लड़के या लड़की को उत्तर-पश्चिम वाले कमरों में सोना चाहिए। दक्षिण की तरफ अगर कोई खिड़की या दरवाजा खुलता हो तो उसे बंद कर देना चाहिए या उसका इस्तेमाल जहां तक संभव हो, कम से कम करना चाहिए। परिहार शास्त्र के अनुसार कन्या के शयनकक्ष में केले का पौधा और लड़के के शयन कक्ष में वटवृक्ष का पौधा किसी गमले में रख दिया जाए तो सप्तम एवं अष्टम भाव के मंगल का दोष शांत होता है।

मंगल दोष के प्रभाव को कम करने के लिए शास्त्रों में अनेक उपाय बताए गए हैं, जिनके करने से जातक (लड़का-लड़की) के मंगलदोष कम हो जाते हैं। इनमें से कुछ प्रचलित उपायों की जानकारी यहां दी जा रही है।

अगर लड़की की जन्मकुंडली में मंगल का स्थान मारक है अर्थात वैधव्य योग या दो विवाह दर्शाने वाला हो तो लड़की को कुंभ विवाह, विष्णुप्रतिमा विवाह या वटवृक्ष विवाह करा कर ही उसका विवाह संपन्न करना चाहिए। कुंभ विवाह का अर्थ होता है घड़े से विवाह, विष्णुप्रतिमा विवाह का अर्थ है मंदिर में जाकर मूर्ति के साथ विवाह करना तथा वटवृक्ष विवाह का अर्थ है पीपल या बरगद। ऐसे पेड़ जिनकी आयु अधिक होती है, के साथ विवाह कराना चाहिए। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार यह विवाह अत्यंत गोपनीय होना चाहिए जिसकी जानकारी लड़की के पिता तक को न हो-

‘‘बाल वैधव्य योगेऽपि, कुम्भदुप्रतिमादिभि:।
कृत्वा लग्नं रह: पश्चात, कन्यो व्याह्येति चापरे।’’

मंगली कन्या को पांच साल तक मंगलागौरी का व्रत करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से लड़की वृद्धावस्था तक विधवा नहीं होती। लड़के को इस स्थिति में मंगल का व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।

लड़की के मंगली होने पर लड़का देखने जाते वक्त पिता की बजाय चाचा, ताऊ, दादा या पिता की तरफ से किसी अन्य रिश्तेदार को भेजने से मंगल का प्रभाव कम होता है। मंगल दोष से युक्त लड़के एवं लड़की के लाल या सफेद मूंगा धारण करने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है। मंगल दोष से युक्त लड़का-लड़की को विधिवत प्राणप्रतिष्ठित ‘मांगलिक यंत्र’ धारण करने से मंगल का दोष कम होता है।  
 
                                                                                                                                                 —आनंद कुमार अनंत


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