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माता नैना देवी मेला: दूसरे नवरात्रे पर सुख-समृद्धि की कामना के लिए...

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Tuesday, April 01, 2014-11:57 AM

हिमाचल प्रदेश के विश्व विख्यात शक्ति पीठ श्री नैना देवी जी में चैत्र नवरात्रे के अवसर पर अब तक 80 हजार से ज्यादा भक्त मां की पूजा अर्चना कर चुके हैं। भारी संख्या में यात्रियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।  नवरात्र के दूसरे दिन माता के ब्रह्मचारिणी स्वरुप की पूजा की जाती है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी।

देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला है। देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। माता ब्रह्मचारिणी की पूजा और साधना करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है। ऐसा भक्त इसलिए करते हैं ताकि मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से उनका जीवन सफल हो सके और अपने सामने आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का सामना आसानी से कर सकें।

ब्रह्मचारिणी देवी के कई अन्य नाम हैं जैसे तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा। कहा जाता है कि देवी ब्रह्मचारिणी अपने पूर्व जन्म में राजा हिमालय के घर पार्वती स्वरूप में थीं। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। वह भगवान शिव को पाने के लिए 1000 साल तक सिर्फ फल खाकर रहीं और 3000 साल तक शिव की तपस्या सिर्फ पेड़ों से गिरी पत्तियां खाकर की। कड़ी तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया।

दूसरे नवरात्रे के उपलक्ष्य पर मां के दरबार में मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की गई। श्रद्धालु भक्तों ने अपने घर परिवार की सुख समृद्धि की कामना के लिए मंदिर में हवन किया। मंदिर प्रशासन के द्वारा यात्रियों की सुविधा हेतु जगह जगह मार्ग दिशा निर्देश लगाए गए हैं। दुकानें पूरी तरह से नई नवेली दुल्हन की तरह सज चुकी हैं और व्यापारियों को इस मेला से अच्छे मुनाफे कि उम्मीद बंधी हुई है। मेला सुख शांति से चल रहा है।

देव भूमि हिमाचल के सुप्रसिद्ध सिद्ध शक्ति पीठ पूरी तरह से धार्मिक रंग में रंग चुके हैं और सुरक्षा के भी पुख्ता बंदोबस्त प्रशासन और पुलिस ने किए हैं।

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