आज करें मां धनलक्ष्मी का सत्कार, मिलेगा आपार धन का वरदान

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Friday, April 04, 2014-8:43 AM

पर्व परिचय: शास्त्रों के अनुसार श्री पंचमी का पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाने का विधान है। धन-संपदा व समृद्घि की प्राप्ति के लिए श्री पंचमी का पूजन किया जाता है । शास्त्रों में श्री पंचमी को श्री लक्ष्मी पंचमी कहकर भी संबोधित किया गया है । इस दिन श्री (महालक्ष्मी) जी की आराधना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है तथा साधक को धनलक्ष्मी (श्री) का आशिर्वाद मिलता है। शास्त्रों में श्री पंचमी के दिन श्रीदेवी जी के अनेक स्त्रोतों जैसे कनकधारा स्त्रोत, लक्ष्मी स्तोत्र, लक्ष्मी सुक्त और मुख्यरूप से श्री सूक्ति का पाठ करने का विधान है। मान्यता है कि श्री पंचमी पर्व पर की गई आराधना द्वारा धनलक्ष्मी जी की स्थाई रूप से प्राप्ति होती है । इस दिन श्री जी की अधिष्ठात्री देवी धनलक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए भक्तों को व्रत रखकर रात्रि में श्री लक्ष्मी का विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए ।

श्रीदेवी वर्णन: शास्त्रों में श्री लक्ष्मी जी के स्वरुप को अत्यंत सुंदर और प्रभावित रुप से दर्शाया गया है । श्री धनलक्ष्मी की पूजा दुख, दरिद्रता और दुर्भाग्य को दूर करने में सहायक होती है । जीवन में धन की दिक्कत, नौकरी या व्यवसाय में असफलता या खर्चों से आर्थिक तंगी से परेशान होने पर देवी लक्ष्मी की विशेष मंत्र से उपासना द्वारा माता लक्ष्मी की कृपा को प्राप्त किया जा सकता है । शास्त्रों में श्री लक्ष्मी को वैभव की अधिष्ठात्री देवी कहकर संबोधित किया गया है । श्रीदेवी जी की आराधना कभी निष्फल नहीं होती । भक्तों की सच्ची श्रद्धा एवं निष्ठा भाव से की गई भक्ति श्रद्घालुओं को लाभ प्रदान करने वाली होती है ।

श्री पंचमी पूजन विधि: श्री पंचमी पूजन में श्री लक्ष्मी जी का विग्रह सजाकर श्रीदेवी की प्रतिमा की स्थापना की जाती है । श्री लक्ष्मी को पंचामृत से स्नान कराया जाता है तत्पश्चात उनका विभिन्न प्रकार से पूजन किया जाता है । पूजन सामग्री में चन्दन, ताल, पत्र, पुष्प माला, अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल तथा नाना प्रकार के भोग रखे जाते हैं। इसके बाद व्रत करने वाले उपवासक को ब्रह्माणों को भोजन कराया जाता है और दान- दक्षिणा दी जाती है। जो इस व्रत को करता है, उसे अष्ट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । इस व्रत को लगातार करने से विशेष शुभ फल प्राप्त होते है. इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए । केवल फल, दूध, मिठाई का सेवन किया जा सकता है ।

श्री पंचमी महत्म: श्रीदेवी जी को धन-सम्पत्ति की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है । धनलक्ष्मी जी जिस पर भी अपनी कृपा दृष्टि डालती हैं वह दरिद्र, दुर्बल, कृपण, के रूपों से मुक्त हो जाता है, समस्त देवी शक्तियों के मूल में लक्ष्मी ही हैं जो सर्वोत्कृष्ट पराशक्ति हैं । समस्त धन संपदा की अधिष्ठात्री देवी कोमलता की प्रतीक हैं लक्ष्मी परमात्मा की एक शक्ति हैं वह सत, रज और तम रूपा तीन शक्तियों में से एक हैं । महालक्ष्मी प्रवर्तक शक्ति हैं जीवों में लोभ, आकर्षण, आसक्ति उत्पन्न करती हैं धन, सम्पत्ति लक्ष्मी का भौतिक रूप है। लक्ष्मी जी का श्री पंचमी पर किया गया पूजन कष्टों से मुक्ति प्रदान करता है ।

श्री पंचमी उपाय:
श्री महालक्ष्मी जी के चित्र पर गुलाबी कपड़े में श्रीफल (नारियल) बांधकर चढाएं।

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: info@kamalnandlal.com


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