इस पिढ़ी को बहुत ही बेरहमी से पीसते हैं शनिदेव

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Saturday, April 05, 2014-3:05 PM

पूर्व जन्म के जो पाप होते हैं उनका परिणाम वर्तमान जन्म में भोगना पड़ता है। दुख, ग्रह क्लेश,बीमारी एवं अन्य परेशानियों का कारण होते हैं शनि ग्रह। जातक की जन्म कुण्डली में शनि जिस स्थान पर बैठे हों उस स्थान से संबंधित कार्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। शनि भाग्य विधाता हैं। धर्म और कर्म के देवता भी माने जाते हैं।

शनि आत्म सीमा, अनुशासन और योजना के माध्यम से शक्ति प्रदान करते हैं। किसी भी जातक पर यह अपना प्रभाव किस प्रकार से छोड़ेंगे यह उस व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। कुण्डली में जिस भी भाव या स्थान में शनि बैठे होते हैं उसी स्थान से ज्ञात होता है कि कहां पर कड़ी चुनौती का सबक मिलेगा। शनि की स्थिति ही व्यक्ति की राह में आने वाली कठिन चुनौतियों और सीमाओं को दर्शाती है।

यदि शनि आपकी कुंडली में उच्च स्थान पर बैठे हैं तो ये संबंधित स्थान के प्रभावों को बढ़ा देते हैं लेकिन अगर यह नीच स्थान पर बैठे हों तो जातक को उस स्थान से संबंधित क्षेत्रों में सचेत रहने की अवश्यकता होती है। शनि देव और शनि ग्रह लोक मानस में इतना रच-बस गए हैं कि जब-जब शनिदेव की बात चलती है तो वह शनि ग्रह पर केंद्रित होकर रह जाती है।

शनिदेव से सभी डरते हैं। उनकी कृपा पाने से सारे काम बन जाते हैं। हिंदू धर्म ग्रंथों में शनिदेव को न्यायाधीश कहा गया है अर्थात अच्छे कर्म करने वाले को अच्छा तथा बुरे कर्म करने वाले को इसका दंड देने के लिए शनिदेव सदैव तत्पर रहते हैं। इसका निर्णय भी शनिदेव अन्य सभी देवों से जल्दी व त्वरित गति से करते हैं। यही कारण है कि गलत काम करने से लोग शनिदेव से डरते हैं।

कुछ पापी मनुष्य पाप करने के उपरांत भी बच जाते हैं और अपने पापों की सजा न पा कर वह बहुत प्रसन्न होते हैं कि उनका गलत कार्य करने के पश्चात बाल तक बांका नहीं हुआ मगर वह यह भुल जाते हैं कि शनि देव जी न्याय प्रिय देव हैं। जो दंड उनको मिलना था उसे बड़ा देने के लिए उसे छोड़ देते हैं और फिर भी मानों बच जाते हैं तो उसकी अगली पीढ़ी को बहुत ही बेरहमी से पीसते हैं।

कहते हैं शनि की कृपा राजा को रंक और रंक को राजा बना सकती है। लेकिन शनि देव इंसान के कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं। शनि की अनुकंपा पानी हो तो अपना कर्म सुधारें, आपका जीवन अपने आप सुधर जायेगा। शनिदेव दुखदायक नहीं, सुखदायक हैं। अच्छा करने वालों की सुरक्षा भी शनिदेव करते हैं।

ज्योतिष के अनुसार शनि अपनी धीमी चाल के कारण जिस राशि में रहते हैं उसके 2.5 वर्ष, उसकी पूर्व की राशि के 2.5 और पश्चात की राशि के 2.5 वर्ष, इस प्रकार एक राशि पर कुल साढ़े सात वर्ष (7.5) वर्ष तक प्रभाव डालता है। इसे ही शनि की 'साढ़ेसाती' कहते हैं।


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