श्री नैना देवी जी: घर-परिवार पर चाहें लक्ष्मी कृपा तो करें शक्ति आराधना

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Saturday, April 05, 2014-11:53 AM

विश्व विख्यात शक्ति पीठ श्री नैना देवी जी में नवरात्र पूजन की धूम है। नवरात्र के पावन उपलक्ष्य में आस्था का सैलाब मंदिर में उमड़ रहा है। मंदिर के पुजारी बर्ग ने मां दुर्गा का सतचंडी का पाठ शुरू किया है। ये महायज्ञ सुख शान्ति और विश्व कल्याण के लिए किया जाता हैं ताकि यात्री नवरात्रों में नवरात्र पूजन करके खुशी ख़ुशी अपने घरों को लौटे और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो। इस पाठ को 31 पुजारी कर रहे हैं।

पुजारी नीलम शर्मा ने पत्रकारों को बताया की इस महायज्ञ की पूर्ण आहुति दशमी के दिन पड़ेगी सुबह छठे नवरात्रे के उपलक्ष्य पर इन तीर्थस्थलों पर मां के कत्यायनी स्वरूप की पूजा की गई।  इन नवरात्रों में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान और अन्य प्रदेशों व विदेशों से यात्री मां के दर्शनों के लिए पंहुच रहे हैं और जायदातर यात्री पंजाब से नैना देवी पंहुच रहे हैं।

नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी कात्यायनी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है। यह अमोद्य फलदायिनी हैं। इनकी पूजा अर्चना द्वारा सभी संकटों का नाश होता है। मां कात्यायनी दानवों तथा पापियों का नाश करने वाली हैं। भक्त के भीतर अद्भुत शक्ति का संचार होता है। इसलिए कहा जाता है कि इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

इस दिन साधक का मन 'आज्ञा चक्र' में स्थित रहता है। योग साधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। श्री कात्यायनी की उपासना से आज्ञा चक्र जाग्रति की सिद्धियां साधक को स्वयंमेव प्राप्त हो जाती हैं। साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होने पर उसे सहजभाव से मां कात्यायनी के दर्शन प्राप्त होते हैं। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौलिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है तथा उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा विनष्ट हो जाते हैं।

कहा जाता है महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए यह देवी कात्यायनी कहलाईं। दूसरी कथा यह है कि जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बहुत बढ़ गया, तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सबसे पहले इनकी पूजा की.इस कारण से भी यह कात्यायनी कहलायीं।

नवरात्र के पावन उपलक्ष्य पर अपने घर परिवार पर सुख समृद्धि एवं लक्ष्मी की कामना कर रहे हैं। इसके अलावा सप्तमी और अष्टमी नवरात्रे के दिन और भी ज्यादा भीड़ उमड़ने की संभावना है। जिस के लिए मंदिर न्यास ने पुख्ता बंदोबस्त कर लिए हैं।


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