जानें, इस बार क्यों खास है कंजक पूजन

  • जानें, इस बार क्यों खास है कंजक पूजन
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Saturday, April 05, 2014-4:30 PM

भारत में धार्मिक उत्सवों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है। चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी को दुर्गा अष्टमी के साथ साथ अशोकाष्टमी भी कहा जाता है। शास्त्र अनुसार अशोकाष्टमी के दिन अशोक के पुष्पों से देवी दुर्गा की पूजा की जाती है।

शास्त्र अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी को सभी तीर्थ एवं नदियां ब्रह्मपुत्र में आ कर समा जाती हैं। उस दिन के स्नान से अजय फल की प्राप्ति होती है। दुर्गाष्टमी के दिन भगवती दुर्गा का पूजन कर नवरात्र की पूर्णाहुति की जाती है। भगवती दुर्गा को उबले हुए चने, हलवा-पूरी, खीर, पुए आदि का भोग लगाया जाता है। इस दिन देवी दुर्गा की मूर्ति का मन्त्रों से विधिपूर्वक पूजन किया जाता है। शास्त्र अनुसार इस दिन कन्या पूजन करने का विधान है।

अशोक वृक्ष का धार्मिक महत्व: अशोक वृक्ष को भगवान राम ने शोक दूर करने वाले पेड़ की उपमा दी थी। शास्त्र अनुसार अशोक वृक्ष को पवित्र माना गया है। शोक (दु:ख) को दूर करने के कारण ही इसे अशोक नाम की उपमा दी गई है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है के कामदेव के पंच पुष्प बाणों में एक अशोक के पुष्पों का बाण है। रावण ने सीता हरण के बाद उन्हें अशोक-वाटिका में ही जगह दी थी।

अशोक वृक्ष का वास्तु और ज्योतिष महत्व: वास्तु अनुरूप अशोक का वृक्ष वास्तुदोषों से मुक्ति दिलाने में बड़ा कारगार है। ऐसा पुराणोक्त वर्णित है के अशोक का वृक्ष आवास की उत्तर दिशा में लगाना विशेष मंगलकारी माना जाता है तथा अशोक के पत्ते घर में रखने से शांति रहती है। अशोक के वृक्ष पर सूर्य और बुद्ध ग्रह का अधिपत्य है तथा इसे लगाने से राहू की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।

अशोकाष्टमी दुर्गा पूजन: जिसे कभी शोक (दुख) ना होता है वही अशोक है। शास्त्र अनुसार अशोकाष्टमी के दिन अशोक के पुष्पों से देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। अशोक की आठ कलियों से युक्त जल पीना तथा इस मंत्र के देवी दुर्गा की पूजा करनी चाहिये।

"त्वामशोक हराभीष्टं मधुमास-समुद्भवम्।
 पिबामि शोकसन्तप्तो मामशोक सदा कुरु।।"


उपाय: मेष से लेकर मीन राशि वालों के लिए दुर्गा अशोकाष्टमी पर किए जाने वाले ये सरल उपाय हैं जो आपके जीवन से दुर्भाग्य का सफाया करेंगे और आपका जीवन बनेगा शोक रहित।

    मेष: जायफल पर सिंदूर लगाकर देवी दुर्गा पर चढ़ाएं।

    वृष: देवी दुर्गा पर अशोक के फूल चढ़ाएं।

    मिथुन: पान के पत्ते पर रोली लगाकर देवी दुर्गा पर अर्पित करें।

    कर्क: दुर्गा माता पर साबूदाने की खीर का भोग लगाएं।

    सिंह: देवी दुर्गा पर अशोक के पत्ते चढ़ाएं।

    कन्या: हरे कपडे में मिश्री बांधकर माता दुर्गा पर अर्पित करें।

    तुला: दही में शहद मिलाकर देवी दुर्गा को भोग लगाएं।

    वृश्चिक: अशोक के पत्ते पर लाल चंदन लगाकर देवी पर चढ़ाएं।

    धनु: देवी के चित्र के आगे पीली सरसों के दाने कर्पूर से जलाएं।

    मकर: मां दुर्गा पर काजल चढ़ाएं।

    कुंभ: नीले कपडे में श्रीफल (नारियल) बांधकर मां दुर्गा पर चढ़ाएं।

    मीन: पीले कपडे में चनादाल बांधकर मां दुर्गा पर चढ़ाएं।


आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: info@kamalnandlal.com


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