भगवान राम होंगे मेहरबान तभी बनेंगे बिगड़े काम

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Tuesday, April 08, 2014-11:19 AM

शास्त्र अनुसार रामनवमी पर्व भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी को मानाने का विधान है। पुरुषोतम भगवान राम के जन्मोत्सव के दिन सरयू नदी में स्नान करके लोग पुण्य लाभ कमाते हैं। श्री राम को "मर्यादा पुरुषोतम" कहा जाता है। शास्त्रों में श्रीराम को भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से सातवां अवतार माना जाता है।

रामनवमी का ज्योतिषीय महत्व: शास्त्र अगस्त्यसंहिता के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन, दोपहर बारह बजे (अभिजीत महूर्त में), पुनर्वसु नक्षत्र, कर्कलग्‍न में जब सूर्य अन्यान्य पांच ग्रहों की शुभ दृष्टि के साथ मेष राशि पर विराजमान थे, तभी माता कौशल्या के गर्भ से साक्षात्‌ भगवान् श्रीराम का जन्म हुआ। श्रीराम की जन्म कुण्डली की विशेषता थी की सूर्य मेष राशि में होकर उच्च के थे और बुद्ध के साथ युति कर रहे थे। गुरु कर्क राशि में उच्च होकर चंद्रमा के साथ युति कर रहे थे, शुक्र उच्च के होकर नवम भाव में मीन में विराजित थे, राहू कन्या छठे भाव में होकर कन्या के होकर उच्च के थे और केतु मीन राशि के द्वादश भाव में उच्च होकर विराज रहे थे।  

रामनवमी का धार्मिक महत्व: धार्मिक दृष्टि से चैत्र शुक्ल नवमी का विशेष महत्व है। त्रेता युग में चैत्र शुक्ल नवमी के दिन रघुकुल शिरोमणि महाराज दशरथ एवं महारानी कौशल्या के यहां अखिल विश्वनायक राम ने पुत्र के रूप में जन्म लिया था। राम का जन्म दिन के बारह बजे हुआ था, जैसे ही सौंदर्य निकेतन, शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण कि‌ए हु‌ए चतुर्भुजधारी श्रीराम प्रकट हु‌ए तो सम्पूर्ण ब्रह्मांड उस समय विस्मित हो गया था।

रामनवमी पूजन: रामनवमी पूजन में सर्वप्रथम श्रीराम लला के चित्र अथवा मूर्ति का जल से अभिषेक किया जाता है। उसके बाद धूप, दीप रोली, मोली, फूल इत्यादी षोडशोपचार किए जाते हैं तत्पश्चात, श्रीराम लला के चित्र पर ऐपन (हल्दी और चावल को पीसकर बनाया गया गीला उबटन) चढ़ाया जाता है, इसके बाद मूर्तियों पर मुट्ठी भरके चावल चढ़ाए जाते हैं। पूजा के बाद कर्पूर और चंदन जलाकर तथा घंटी और शंख बजकर आ‍रती की जाती तथा घर के सभी सदस्यों पर पवित्र जल छिड़का जाता है। पूजा के बाद परिवार की सबसे छोटी महिला सदस्‍य परिवार के सभी सदस्‍यों को टीका लगाती है। रामनवमी पर्व के दिन मंदिर में अथवा मकान पर ध्वजा, पताका, तोरण और बंदनवार आदि से सजाने का विशेष विधि-विधान है। व्रत के दिन कलश स्थापना और राम जी के परिवार की पूजा करनी चाहिए।

उपाय: रामनवमी के उपलक्ष में कुछ ऐसे अचूक उपाय जिनसे आपका जीवन मंगलमय होगा और अमंगल का होगा नाश।

मेष: श्री राम के चित्र के आगे चमेली के तेल का दीपक जलाएं। इस उपाय से जीवन से बाधाएं और चर्म रोग समाप्त होंगे।

वृष: मसूर सिर से वारकर राम लाला के चित्र अर्पित करें। इस उपाय से जीवन से रोग और पीड़ाओं का विनाश होगा।

मिथुन: पीपल के पत्ते पर सिंदूर से "राम" हनुमानजी के चित्र पर चढ़ाएं। इस उपाय से दुर्घटनाओं से बचेंगे और होगा आर्थिक लाभ।

कर्क: श्री राम के चित्र पर दही भल्ले का भोग लगाएं। इस उपाय से लंबे समय से चला आ रहा आर्थिक घाटे का दौर समाप्त होगा।

सिंह: श्री राम दरबार के चित्र पर मीठे चावल का भोग। इस उपाय से परेशानी में विचलित नहीं होंगे और शारीरिक बल मिलेगा।

कन्या: नींबू पर सिंदूर लगाकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। इस उपाय से दुर्भाग्य समाप्त होगा और भाग्य से मिलेगा प्रमोशन।

 तुला: सीताराम के चित्र पर हल्दी की गाठें अर्पित करें। इस उपाय से शत्रु होंगे परास्त और रोगों से मिलेगा छुटकारा।

वृश्चिक: रामदरबार पर अरहर दाल की खिचड़ी का भोग लगाएं। इस उपाय से सभी संकट समाप्त होंगे और जीवन बनेगा प्रकाशमय।

धनु: श्रीराम के चित्र पर साबूदाने की खीर का भोग लगाएं। इस उपाय से दांपत्य जीवन से कटुता होगी समाप्त और परिवार में रहेगी खुशहाली।

मकर: श्री रामलला के चित्र पर शहद चढ़ाएं। इस उपाय से मनोवीकार, दुर्घटना, ज्वर जैसे विकारो से मिलेगी मुक्ति।

कुंभ: श्री राम जी के चित्र पर काजू अर्पित करें। इस उपाय से लंबे समय से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे।

मीन:
उरद और चावल की खिचड़ी का प्रसाद चढ़ाएं। इस उपाय से संतान को सभी बीमारियो से मिलेगा छुटकारा।

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: info@kamalnandlal.com


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