सांसारिक कष्ट, शारीरिक रोग और मानसिक चिंताओं का सिद्ध प्रयोग

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Tuesday, April 08, 2014-8:02 AM

श्री राम नवमी मात्र उत्सव नहीं बल्कि नवरात्र का अंतिम दिन होने से अत्यंत शुभ दिन है। एक ओर जहां पतितपावन श्रीराम की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालु-भक्त अपने रोग-दोष व पाप नष्ट करते हैं वहीं महानवमी होने के नाते माता दुर्गा की आराधना और कन्या पूजन करने से अनेक सांसारिक कष्ट सहज ही समाप्त हो जाते हैं।  


पद्मपुराण में लिखा है कि ‘रामायण’ के पाठ से व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति अतिशीघ्र होती है। रामायण के पाठ विधान में लिखा है कि मंगल तथा लौकिक लाभ एवं संतान प्राप्ति के लिए बालकांड का पाठ करना चाहिए। सुंदरकांड का पाठ एक सिद्ध प्रयोग तो है ही साथ ही इसके पाठ से ऋण व शत्रु भय से भी मुक्ति मिलती है।


जिन सकाम भक्तों को रोगों से शीघ्र लाभ या शारीरिक कष्ट का निवारण चाहिए कि उन्हें प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ‘श्रीराम रक्षा स्तोत्र’ के 11 पाठ करने चाहिएं। इस पाठ से सांसारिक कष्ट, शारीरिक रोग और मानसिक चिंताएं दूर हो जाती हैं।
 
रोग नष्ट के लिए

यदि कोई व्यक्ति असाध्य रोगों से पीड़ित हो तो शुद्ध आसन पर किसी विद्वान ब्राह्मण को बिठाकर उससे ‘श्रीरामरक्षास्तोत्र’ के 108 पाठ करवाने चाहिएं। जब ये पाठ हो रहे हों तो एक स्वच्छ पात्र में गंगाजल को ये 108 पाठ सुना कर उस अभिमंत्रित गंगाजल को रोगी को पिला देना चाहिए। इससे असाध्य रोग भी श्रीराम कृपा से सही हो सकते हैं, ऐसी संतों व विद्वानों की मान्यता है।

विपत्ति निवारण के लिए

यदि कोई व्यक्ति किसी भी विपत्ति या संकट में फंस जाए तो उसे तत्काल एकाग्र चित्त से वीर वेष धारी भगवान श्रीराम का वीरवर अनुज लक्ष्मण के साथ ध्यान करना चाहिए तथा निम्न मंत्र का कम से कम 11 बार जप करने से भी वह व्यक्ति तत्काल आपदा से बच जाता है-
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्।।


कल्याण की प्राप्ति के लिए
जिस व्यक्ति को सब प्रकार के सुख, यश और विजय की परम अपेक्षा हो, उसे चाहिए कि वह रामभक्ति की शाश्वत परंपरा के सिद्ध रामानंदी वैरागी महात्मा से ‘श्रीराम तारक मंत्र’ की दीक्षा लें। इस राम तारक मंत्र का प्रतिदिन 108 बार असान पर बैठकर पूर्वाभिमुख होकर जप करें। जप शुरू करने से पहले इस मंत्र से परमप्रभु श्रीरामचंद्र का परिवार के साथ ध्यान करें-

रामं रामानुजं सीतां भरतं भरतानुजम्।
सुग्रीवं वायुसूनुच्च प्रणमामि पुन: पुन:।।


ग्रह पीड़ा शांति के लिए

सभी ग्रहों की शांति के लिए व्यक्ति को नित्य ‘रामायण’ का पाठ करना चाहिए। ग्रहशांति एवं ग्रह पीड़ा की निवृत्ति के लिए ‘सीताराम’ नाम का प्रतिदिन 1100 बार जप करने का विधान शास्त्रों में है।

                                                                                                                                                        -शास्त्री कोसलेन्द्रदास


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